जमशेदपुर। वृद्धावस्था को जीवन का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय इसे अनुभव, आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक विकास के स्वर्णिम अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए। जीवन का हर क्षण अनमोल है। इसलिए बीते समय की यादों में उलझने के बजाय वर्तमान में प्रसन्न रहकर जीवन जीना और दूसरों के जीवन में खुशियां बांटना जरूरी है। मनुष्य को अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल समाज सेवा, परोपकार और आत्मिक उन्नति के लिए करना चाहिए। यह बातें कोलकाता से आए महेश भाई ने रविवार को सोनारी स्थित यूनिवर्सल पीस पैलेस, मरीन ड्राइव में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
ब्रह्माकुमारीज के सामाजिक सेवा प्रभाग की ओर से ‘संगम : गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में शहर की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े सैकड़ों वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। महेश भाई ने कहा कि समय, कर्म और स्वास्थ्य जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। उम्र बढ़ने के साथ मनुष्य को अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए और जीवन के अनुभवों को समाज के हित में लगाना चाहिए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को अतीत की चिंताओं से मुक्त होकर वर्तमान को आनंदपूर्ण बनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज की कोल्हान प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने कहा कि बुजुर्ग परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव और जीवन से प्राप्त सीख नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करना और उनके आशीर्वाद का महत्व समझना परिवार में अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसमें दोस्त संघ, छत्तीसगढ़ संस्कृति समिति और नागरिक संघ समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। संस्कारोदया एकेडमी के बच्चों ने नाटक प्रस्तुत कर बुजुर्गों की भावनाओं और उनके प्रति परिवार की जिम्मेदारियों को दर्शाया। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि व्यस्त दिनचर्या के कारण कई बार बुजुर्गों को परिवार के सदस्यों का पर्याप्त समय और स्नेह नहीं मिल पाता है।
आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा ब्रह्माकुमारीज के राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के तहत संचालित राष्ट्रव्यापी परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना की प्रस्तुति दो मई 2025 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष की गई थी। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ नागरिकों को राजयोग मेडिटेशन कराया गया। इसके माध्यम से उन्होंने मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति का अनुभव किया। अंत में ब्रह्माभोजन प्रसाद वितरित किया गया।

