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*मातृभाषा आधारित शिक्षा से बच्चों की पढ़ाई में दिख रहा सकारात्मक बदलाव* *पाम्पड़ा और डिलियामार्चा के प्राथमिक विद्यालयों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण*

चाईबासा: बच्चों की भाषाई समझ और बौद्धिक विकास को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संचालित मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा लेने के लिए सदर प्रखंड के दो प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया गया।

इस क्रम में सहायक कार्यक्रम अधिकारी सुभाष हेम्ब्रम और पलाश नोडल अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय पाम्पड़ा और प्राथमिक विद्यालय डिलियामार्चा का दौरा किया। अधिकारियों ने कक्षा एक से तीन तक के बच्चों की पढ़ाई का अवलोकन किया और शिक्षण पद्धति के प्रभाव की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बच्चे अपनी मातृभाषा में सहज होकर सवालों के जवाब दे रहे हैं। मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई शुरू कर धीरे-धीरे हिंदी और अंग्रेजी सिखाने की प्रक्रिया से बच्चों को सीखने में मदद मिल रही है। इससे बच्चे बिना झिझक कक्षा की गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।

अधिकारियों ने बच्चों की अक्षर पहचानने, छोटे शब्द और कहानियां पढ़ने तथा गिनती, जोड़ और घटाव जैसे बुनियादी गणितीय कार्यों को समझकर करने की क्षमता का भी जायजा लिया। उन्होंने खेल-कूद, खिलौनों, चित्रों और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने की पद्धति की सराहना की।

निरीक्षण में यह भी देखा गया कि बच्चे कक्षा में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, शिक्षकों से सवाल पूछ रहे हैं और अपने सहपाठियों के साथ मिलकर सीख रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की समझ विकसित करने के लिए पढ़ाई को सरल और रोचक बनाना जरूरी है।

इस दौरान शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने अभिभावकों से बच्चों की प्रगति रिपोर्ट और कॉपियों को नियमित रूप से देखने तथा घर में पढ़ाई के लिए सहज माहौल तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों पर मानसिक दबाव डालने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

सहायक कार्यक्रम अधिकारी सुभाष हेम्ब्रम और पलाश नोडल अधिकारी ने दोनों विद्यालयों के शिक्षकों और विद्यालय परिवार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान कार्यक्रम बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने में मददगार साबित हो रहे हैं।

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