जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत पोढ़ाडीहा पंचायत के मंगलासाई चांदनी चौक में बुधवार को भूमिज एकता मंच, लखनसाई के तत्वावधान में भूमिज विद्रोह के महानायक वीर शहीद रघुनाथ सिंह भूमिज का 193वां शहादत दिवस श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और वीर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत नाया राजेश सरदार के नेतृत्व में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद मंगलासाई चांदनी चौक में वीर शहीद रघुनाथ सिंह भूमिज के नाम से शिलापट्ट स्थापित किया गया। शिलापट्ट स्थापना के बाद श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में मौजूद लोगों ने रघुनाथ सिंह भूमिज के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके संघर्ष एवं बलिदान को याद किया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए हातु सरदार रविंद्र सरदार, सिद्धेश्वर सरदार, हिमांशु सरदार और हरीश भूमिज ने कहा कि रघुनाथ सिंह भूमिज झारखंड की धरती के उन वीर सपूतों में शामिल थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि 1832 के भूमिज विद्रोह में रघुनाथ सिंह भूमिज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को शहादत दिवस मनाया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि रघुनाथ सिंह भूमिज दामपाड़ा क्षेत्र के रहने वाले थे। अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की परंपरा उनके परिवार में भी रही। उनके दादा जगन्नाथ सिंह और पिता वैद्यनाथ सिंह ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। समाज के लोगों ने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे वीर योद्धाओं के संघर्ष और बलिदान की जानकारी देने की आवश्यकता है, ताकि उनके इतिहास और योगदान को आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम में हल्दीपोखर, कालिकापुर और पोटका क्षेत्र से समाज के अनेक लोग शामिल हुए। इनमें सरदार हिमांशु सरदार, सिद्धेश्वर सरदार, हरीश सिंह भूमिज, हातु सरदार रविंद्र सरदार, रायचरण सरदार, सुबोध सरदार, नाया राजेश सरदार, देउरी देव रंजन सरदार, डाकुया श्रीकांत सरदार, मानिक सरदार, धीरेंद्र नाथ सरदार, जुमिता सरदार, बुधुराम सरदार, संजीव सरदार, सोमवारी सरदार, ममता सरदार, रांगड़ी सरदार, पार्वती सरदार, रामेश्वर सरदार, निर्मल सरदार, हराधन सरदार, गुलाम सरदार और देबू सरदार सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

