Breaking
Tue. Sep 15th, 2026

*सारंडा एफपीसी की आमसभा में किसानों की भागीदारी और विकास योजनाओं पर जोर*

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में सारंडा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीसी) की वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक आमसभा (एजीएम) नोआमुंडी आदिवासी एसोसिएशन परिसर में आयोजित की गई। टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से संचालित एफपीसी की आमसभा में करीब 150 शेयरधारकों के अलावा निदेशक मंडल के सदस्य, सामुदायिक प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए।

आमसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट और ऑडिट रिपोर्ट शेयरधारकों के समक्ष रखी गई, जिसे अनुमोदित किया गया। बैठक में एफपीसी के वर्षभर के कार्यों, उपलब्धियों और वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही आगामी बिजनेस प्लान, नए सदस्यों को जोड़ने तथा किसानों को वित्तीय संस्थानों और सरकारी योजनाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में टाटा स्टील लिमिटेड के विजय-II माइंस के चीफ राजीव कुमार पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। टाटा स्टील के नोआमुंडी हेड नितेश माहेश्वरी, टाटा स्टील फाउंडेशन के नोआमुंडी इम्पैक्ट क्लस्टर हेड रविंद्र कुमार, यूनिट लीड संदीप केसरवानी, लीड एग्रीकल्चर पार्थ सारथी और मैनेजर एग्रीकल्चर सतीश पाणिग्रही समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्थानीय समुदाय की ओर से मानकी निरंजन बोबोंगा और सुरेंद्र चतोम्बा, बैंक ऑफ इंडिया नोआमुंडी शाखा की बैंक मैनेजर ज्योति बिरुआ तथा SIDHKOFED के प्रोजेक्ट मैनेजर रंजीत गुप्ता भी आमसभा में शामिल हुए।

इस दौरान शेयरधारकों के बीच शेयर प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रगतिशील किसान हेमंत कुमार बेहरा, मनोज पूर्ति और चांदमनी लागुरी को सम्मानित किया गया।

सारंडा एफपीसी की ओर से कस्टम हायरिंग सेंटर, एग्री-इनपुट सेंटर और मशरूम स्पॉन प्रोडक्शन सेंटर जैसी किसान-केंद्रित सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इन सेवाओं के माध्यम से किसानों को कृषि उपकरण और इनपुट उपलब्ध कराने, खेती की लागत कम करने तथा अतिरिक्त आय और ग्रामीण उद्यमिता के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

आमसभा में किसानों से एफपीसी की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने और सामूहिक खरीद, विपणन, मूल्य संवर्धन तथा कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की अपील की गई। कार्यक्रम के अंत में सारंडा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को मजबूत और टिकाऊ किसान-स्वामित्व वाली संस्था के रूप में विकसित करने तथा क्षेत्र के किसानों के लिए आय और आजीविका के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया।

Related Post