जमशेदपुर। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह सोमवार को विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने जमशेदपुर पहुंचे। परिसदन में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार और झारखंड की राजनीति के साथ-साथ झारखंड के गठन के उद्देश्य और राज्य की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस सपने और उद्देश्य के साथ बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ था, वह सपना आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है।
आनंद मोहन सिंह ने कहा कि आंदोलन के दौरान वृहद झारखंड की परिकल्पना की गई थी। इसमें बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को शामिल करने की बात थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और अंततः केवल बिहार का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक और खनिज संपदा से बेहद समृद्ध है, इसके बावजूद राज्य में बेरोजगारी और गरीबी की समस्या बनी हुई है। उन्होंने खनिज संपदा से मिलने वाली रॉयल्टी का लंबे समय से पुनरीक्षण नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
पूर्व सांसद ने कहा कि झारखंड बनने के समय बिहार को लेकर कई तरह की राजनीतिक टिप्पणियां की जाती थीं, लेकिन आज बिहार में विकास के कई क्षेत्रों में तेजी आई है। दूसरी ओर, झारखंड को अपनी प्राकृतिक संपदा के अनुरूप देश के समृद्ध और विकसित राज्यों में शामिल होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान लोगों ने जिस बदलाव का सपना देखा था, उसके लिए कई लोगों ने संघर्ष किया और शहादत दी, लेकिन वह उद्देश्य अभी भी अधूरा है।
उन्होंने कहा कि अब झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ-साथ प्रबुद्ध समाज को भी राज्य की स्थिति की समीक्षा करने की जरूरत है। आनंद मोहन ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर उद्योगपतियों की नजर है, ऐसे में राज्य के संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह और किसके हित में हो रहा है, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास में आ रही रुकावटों के लिए केवल शासक वर्ग ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि प्रबुद्ध समाज की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

