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फोस्टर केयर से चार बेसहारा बच्चों को मिला परिवार का सहारा, छह माह में कुपोषण से हुए मुक्त

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से मिशन वात्सल्य के तहत संचालित फोस्टर केयर योजना बेसहारा और अनाथ बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बन रही है। इसी पहल के तहत मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा क्षेत्र के एक गांव के चार बेसहारा बच्चों को परिवार आधारित देखभाल का सहारा मिला है। इनमें एक बालिका और तीन बालक शामिल हैं। फोस्टर केयर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिला पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर है।

जानकारी के अनुसार बच्चों के पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां किसी तरह चारों बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। बाद में मां की भी मृत्यु हो गई। माता-पिता का साया उठने के बाद बच्चों के सामने भोजन, सुरक्षा, शिक्षा और देखभाल का गंभीर संकट खड़ा हो गया। परिवार में मौजूद वृद्ध दादी भी उम्र और परिस्थितियों के कारण बच्चों की समुचित देखभाल करने में सक्षम नहीं थीं।

मामले की जानकारी जिला बाल संरक्षण इकाई को मिलने के बाद बच्चों को परिवार आधारित देखभाल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। गैर-संस्थागत देखभाल पदाधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। बच्चों की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए उनके लिए उपयुक्त फोस्टर परिवार की तलाश की गई।

बाल कल्याण समिति तथा गांव स्तर पर हुई बैठकों और जांच के बाद मनोहरपुर प्रखंड के धानापाली गांव निवासी सुखदेव टोप्पो और उनकी पत्नी दयन्ती खलखो को फोस्टर परिवार के रूप में चुना गया। फोस्टर परिवार में आने के समय चारों बच्चों की स्थिति चिंताजनक थी। उन्हें नियमित दिनचर्या और स्वच्छता का पर्याप्त ज्ञान नहीं था तथा वे कुपोषण से भी प्रभावित थे।

फोस्टर परिवार और जिला बाल संरक्षण इकाई के निरंतर प्रयास से बच्चों को नियमित भोजन, स्वच्छता, शिक्षा, खेलकूद, योग और व्यायाम का बेहतर वातावरण मिला। उनका नजदीकी सरकारी प्राथमिक विद्यालय में नामांकन कराया गया। करीब तीन माह के भीतर बच्चों के व्यवहार और दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा। उन्होंने हिंदी बोलना सीखा और फोस्टर परिवार के सदस्यों को मां-पापा कहकर संबोधित करने लगे। लगभग छह माह के भीतर चारों बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए। उनके अक्षर ज्ञान, भाषा ज्ञान और सामाजिक व्यवहार में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। बच्चों की खेलकूद, व्यायाम, योग और संगीत में रुचि बढ़ी।

रविवार को उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि अनाथ और बेसहारा बच्चों को केवल संरक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित पारिवारिक वातावरण, स्नेह, शिक्षा, पोषण और सम्मान के साथ बचपन उपलब्ध कराना जरूरी है। फोस्टर केयर परिवार आधारित ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को अपनापन और सुरक्षित वातावरण मिल सकता है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त परिवारों से बच्चों को जोड़कर उनके बेहतर भविष्य का निर्माण करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

बच्चों की देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया में सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग खुशेन्द्र सोनकेशरी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनिता तिवारी का भी नियमित मार्गदर्शन रहा। फोस्टर परिवार, ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ताओं, बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई के समन्वित प्रयास से चारों बच्चों को परिवार आधारित देखभाल का लाभ मिला और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई।

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