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नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में नाबालिग बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के करीब चार साल पुराने मामले में सोमवार को विशेष पोक्सो अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला विशेष पोक्सो केस संख्या 19/2020 की सुनवाई पूरी होने के बाद सुनाया गया।

मामला चक्रधरपुर थाना क्षेत्र का है। 24 जनवरी 2020 को पम्पु रोड निवासी अखिलेश सिंह, पिता राजेन्द्र सिंह के खिलाफ नाबालिग बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा करने के आरोप में कांड संख्या 08/2020 दर्ज की गई थी। प्रारंभ में पुलिस ने भारतीय दंड विधान की धारा 363 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने मामले में वैज्ञानिक एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए और जांच पूरी करने के बाद भारतीय दंड विधान की धारा 363, 366(ए), 376(2)(एन), 376(3) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 4/6 के तहत अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।

मामले की सुनवाई पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय संतोष आनंद प्रसाद की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत ने पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं भारतीय दंड विधान की धारा 366 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने तथा धारा 363 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई।

पुलिस की ओर से मामले में जुटाए गए ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्यों को दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण माना गया। लंबे समय से लंबित इस मामले में अदालत के फैसले को चाईबासा पुलिस की जांच और अभियोजन की प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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