चाईबासा: मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले में 2.77 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने और सुनवाई के दौरान निर्धारित 12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करने की बात सामने आने पर पूर्व प्रत्याशी सह सामाजिक कार्यकर्ता रामहरि गोप ने निर्वाचन व्यवस्था और प्रशासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
रामहरि गोप ने कहा कि सरकार के पास लोगों का डिजिटल डेटा, पहचान और विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद आम लोगों को बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब SIR के तहत कुछ दिन पहले ही मतदाताओं के वोटर कार्ड की मैपिंग की गई है, तो अब उन्हीं मतदाताओं से दोबारा 12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि यदि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है तो पहले से उपलब्ध सरकारी और डिजिटल रिकॉर्ड को सत्यापन का आधार बनाया जाना चाहिए। गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई लोगों के पास सभी प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। ऐसे में दस्तावेज आधारित प्रक्रिया वास्तविक मतदाताओं के लिए परेशानी और चिंता का कारण बन सकती है।
रामहरि गोप ने कहा कि पहले मतदाताओं की मैपिंग, फिर नोटिस और अब दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग और प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि दस्तावेजों की मांग का उद्देश्य क्या है, उनका सत्यापन किस आधार पर किया जाएगा और भविष्य में इन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाएगा।
उन्होंने NRC, NPR और CAA जैसे संवेदनशील मुद्दों के संदर्भ में लोगों की आशंकाओं को भी नजरअंदाज नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है और निर्वाचन व्यवस्था को जनता की शंकाओं का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
रामहरि गोप ने कहा कि जब सरकार के पास डिजिटल रिकॉर्ड, वोटर कार्ड, मैपिंग और विभिन्न सरकारी डेटाबेस मौजूद हैं तो आम जनता को अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया में क्यों उलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए है और जनता को व्यवस्था के चक्कर नहीं काटने चाहिए।
उन्होंने निर्वाचन आयोग और प्रशासन से दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और गरीब एवं वंचित वर्ग के अनुकूल बनाने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल दस्तावेजों की कमी के कारण किसी वास्तविक मतदाता के अधिकार या मतदाता सूची में उसके नाम पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

