Breaking
Fri. Aug 21st, 2026

न्यायिक सेवा भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने किया स्वागत

जमशेदपुर। समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने न्यायिक सेवा में नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए अनुभव संबंधी नियमों में बदलाव से विधि के मेधावी विद्यार्थियों के लिए न्यायपालिका में जाने का रास्ता अधिक सुगम होगा।

अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति अगस्त जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने शुक्रवार को भूमिका ट्रस्ट बनाम भारत संघ एवं संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। फैसले में न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए आवश्यक वकालत के अनुभव तथा चयन के बाद प्रशिक्षण और क्लर्कशिप की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली परीक्षा अधिसूचनाओं के संक्रमणकालीन प्रावधानों के तहत बिना पूर्व वकालत अनुभव वाले अभ्यर्थी भी न्यायिक सेवा की परीक्षा के लिए पात्र होंगे। चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद एक वर्ष तक प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण लेना होगा। इसके तहत राज्य न्यायिक अकादमी में एक वर्ष की गहन ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रशिक्षण को तीन वर्ष के वकालत अनुभव की अनिवार्यता में एक वर्ष के अनुभव के समकक्ष माना जाएगा।

इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को एक वर्ष की संरचित क्लर्कशिप पूरी करनी होगी। क्लर्कशिप के पहले छह महीने प्रधान जिला न्यायाधीश अथवा उच्चतर न्यायिक सेवा के किसी सदस्य की निगरानी में और अगले छह महीने संबंधित हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश के मार्गदर्शन में पूरे करने होंगे। संतोषजनक मूल्यांकन के बाद ही उन्हें नियमित नियुक्ति और निर्धारित वेतनमान का लाभ मिलेगा।

सुधीर कुमार पप्पू ने बताया कि एक अप्रैल 2027 के बाद जारी होने वाली परीक्षा अधिसूचनाओं के लिए अभ्यर्थियों के पास कम से कम एक वर्ष का सत्यापित सक्रिय वकालत अनुभव होना आवश्यक होगा। चयन के बाद उन्हें भी एक वर्ष की न्यायिक अकादमी ट्रेनिंग तथा छह-छह महीने की दो चरणों वाली क्लर्कशिप पूरी करनी होगी। प्रशिक्षण अवधि में उन्हें प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सकल वेतन का आधा हिस्सा दिए जाने का प्रावधान रहेगा।

अधिवक्ता पप्पू ने कहा कि वकालत के लंबे अनुभव को अनिवार्य किए जाने से कई प्रतिभाशाली लॉ ग्रेजुएट्स स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे न्यायिक सेवा में जाने से हतोत्साहित हो सकते थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस समस्या का काफी हद तक समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं के प्रवेश से न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

Related Post