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Fri. Aug 21st, 2026

झारखंड में खेल प्रतिभाओं की अनदेखी से नाराज दीपिका कुमारी, बोलीं- सुविधाओं के अभाव में दूसरे राज्यों से पिछड़ रहा प्रदेश

बोकारो। झारखंड की स्टार तीरंदाज और पद्मश्री एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित दीपिका कुमारी ने राज्य की खेल व्यवस्था और खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। बोकारो के मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम में आयोजित द्वितीय एनटीपीसी नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचीं दीपिका ने कहा कि कभी तीरंदाजी के क्षेत्र में झारखंड की अलग पहचान थी और भारतीय टीम में राज्य के कई खिलाड़ी शामिल होते थे, लेकिन वर्तमान समय में झारखंड के खिलाड़ी दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों से पीछे होते जा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए राज्य की खेल नीति और खिलाड़ियों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलने को जिम्मेदार बताया।

दीपिका कुमारी ने कहा कि तीरंदाजी बेहद महंगा खेल है। इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कीमत काफी अधिक होती है और झारखंड के कई खिलाड़ी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में उन्हें उच्च गुणवत्ता के उपकरण, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेल विभाग में कमीशनखोरी के कारण खिलाड़ियों को मिलने वाले संसाधनों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, खिलाड़ियों के लिए लाखों रुपये की कीमत दिखाकर उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि उनकी वास्तविक कीमत और गुणवत्ता उस स्तर की नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि कई उपकरण एक-दो महीने में ही खराब हो जाते हैं।

दीपिका ने कहा कि सरकार की ओर से खिलाड़ियों को नौकरी दिए जाने की पहल अच्छी है, लेकिन नौकरी के बाद उन्हें अभ्यास के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। खिलाड़ियों को नियमित विभागीय ड्यूटी में लगाया जाता है, जिससे उनका प्रशिक्षण प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों को खेल और नौकरी के बीच संतुलन बनाने की सुविधा नहीं मिली तो आने वाले समय में झारखंड में तीरंदाजी की प्रतिभाएं कमजोर पड़ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही मंच, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की है। सरकार को ऐसी ठोस खेल नीति बनानी चाहिए, जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल सके।

इधर प्रतियोगिता के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व खेल मंत्री अमर कुमार बाउरी ने भी राज्य सरकार की खेल नीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की खेल नीति स्पष्ट नहीं है और खिलाड़ियों को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के कार्यकाल में झारखंड के विभिन्न स्थानों पर कंपनियों के सहयोग से तीरंदाजी अकादमियां स्थापित की गई थीं, जहां से खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया। वर्तमान सरकार को उन संस्थानों और खिलाड़ियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

अमर कुमार बाउरी ने मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम की बदहाल स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कभी इस स्टेडियम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, लेकिन वर्तमान में मैदान की स्थिति बेहद खराब है। प्रतियोगिता में देशभर से एक हजार से अधिक खिलाड़ी पहुंचे हैं, इसके बावजूद मैदान की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बोकारो स्टील प्रबंधन पर भी उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय आयोजन में प्रबंधन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से बोकारो स्टील प्लांट और बोकारो शहर की छवि प्रभावित हो रही है।

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