जमशेदपुर: नामदा बस्ती गुरुद्वारा साहब में सोमवार को दिवंगत सरदार महेंद्र सिंह की आत्मिक शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में संगत शामिल हुई और दिवंगत महेंद्र सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
महेंद्र सिंह नामदा बस्ती गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तीन कार्यकाल में करीब नौ वर्ष तक प्रधान रहे। इसके अलावा सरदार गुरमुख सिंह मुखे के प्रधान कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब 15 माह तक सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान की जिम्मेदारी भी संभाली थी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान गुरु घर के रागी जत्थे ने गुरबाणी के शब्दों का कीर्तन किया। “री बाई गोविंद नाम न विसरो”, “मेरा मुझ मे कछु नहीं जो कुछ है सो तेरा” और “पाप कमावनदैया तेरा कोई ना बेली राम” का गायन कर दिवंगत की आत्मिक शांति के लिए अरदास की गई।
वक्ताओं ने याद किया महेंद्र सिंह का योगदान
सभा को साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह, स्त्री सत्संग सभा की पूर्व प्रधान कमलजीत कौर, रंगरेटा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा नेता सरदार मनजीत सिंह गिल, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी के संरक्षक सरदार गुरमुख सिंह मुखे तथा झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह माथारू ने संबोधित किया।
सरदार गुरमुख सिंह मुखे ने महेंद्र सिंह को याद करते हुए कहा कि वे ऐसी शख्सियत थे, जिन्हें न किसी प्रमाणपत्र की जरूरत थी और न परिचय की। उनके व्यवहार में तल्खी, घमंड या गुरूर नहीं था। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग पद के लिए एक-दूसरे को धोखा देते हैं, लेकिन महेंद्र सिंह ईमानदार और वफादार व्यक्ति थे।
मुखे ने महेंद्र सिंह के करीबी साथियों के रूप में सरदार अवतार सिंह भाटिया, मानगो गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार बलजीत सिंह, झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी के प्रधान एवं सोनारी गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान सरदार तारा सिंह, सरदार गुरप्रीत सिंह, सरदार दीदार सिंह, सरदार सतबीर सिंह भाटिया और सरदार गुरजीत सिंह भाटिया समेत अन्य साथियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि जब उनके कार्यकाल में महेंद्र सिंह को सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान की जिम्मेदारी दी गई थी, तब महेंद्र सिंह ने इसे अपने लिए बड़ा सम्मान बताया था। उन्होंने कहा था कि रंगरेटे गुरु के बेटे को गुरु साहिबान के बाद गुरमुख सिंह मुखे से जो सम्मान मिला, उसे वे जीवन भर नहीं भूल सकते।
सम्मान को लेकर रखा गया प्रोटोकॉल
कार्यक्रम के दौरान दिवंगत महेंद्र सिंह के परिवार को सम्मानित करने के लिए प्रमाणपत्र देने की बात भी सामने आई। इस दौरान संरक्षक सरदार गुरमुख सिंह मुखे ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह माथारू द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने के बाद ही दिवंगत महेंद्र सिंह जैसी शख्सियत को सम्मान दिया जाना उचित होगा।
बड़ी संख्या में संगत रही मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में सरदार जगजीत सिंह, सरदार सिकंदर सिंह, सरदार मनप्रीत सिंह, सरदार परमजीत सिंह, सरदार अमरजीत सिंह, सरदार गुलशन सिंह, सरदार गुरदेव सिंह, सरदार जितेंद्र सिंह, सरदार सोनू भाटिया, सरदार रणधीर सिंह, सरदार बलबीर सिंह, सरदार अजय सिंह, सरदार जसबीर सिंह, सरदार कुलबीर सिंह, सरदार कुलविंदर सिंह, सरदार सुखविंदर सिंह राजू, सरदार सुखदेव सिंह मली, सरदार गुरदीप सिंह काके सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन नामदा बस्ती गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव ने किया।
संगत की अधिक भीड़ के कारण होटल में कराया गया लंगर
श्रद्धांजलि सभा में संगत की संख्या अधिक होने के कारण नामदा बस्ती में स्थान कम पड़ गया। इसके बाद दिवंगत महेंद्र सिंह के परिवार की ओर से गोलमुरी स्थित एक बड़े होटल में लंगर की व्यवस्था की गई। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर छका।
दिवंगत महेंद्र सिंह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। कार्यक्रम के दौरान परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया गया।
महेंद्र सिंह के नाम पर संस्था शुरू करने का सुझाव
सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी की ओर से दिवंगत महेंद्र सिंह की आत्मिक शांति के लिए अरदास की गई। साथ ही परिवार से आग्रह किया गया कि यदि भविष्य में उनके नाम पर ट्रस्ट, स्कूल या कॉलेज स्थापित करने की इच्छा हो तो उसके संचालन में परिवार के सदस्यों को शामिल किया जाए, ताकि उनके सामाजिक योगदान और स्मृतियों को आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में नामदा बस्ती गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और दिवंगत महेंद्र सिंह के परिवार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

