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*सपरिवार महादेवशाल मंदिर पहुंचे उपायुक्त मनीष कुमार, भगवान भोलेनाथ का किया जलार्पण*

चाईबासा: सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार सपरिवार गोईलकेरा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध महादेवशाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने विधि-विधान के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर जलार्पण किया। इस दौरान उन्होंने जिलेवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

महादेवशाल मंदिर पहुंचने पर उपायुक्त ने परिवार के साथ श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा की। उन्होंने निर्धारित पूजा-विधि के अनुसार भगवान भोलेनाथ का जलार्पण कर आशीर्वाद लिया। सावन की सोमवारी को लेकर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा।

पूजन-अर्चना के बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने मंदिर परिसर की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता, पेयजल, आवागमन और दर्शन-पूजन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और मंदिर समिति के सदस्यों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

उपायुक्त ने कहा कि सावन की सोमवारी के दौरान महादेवशाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन और मंदिर समिति के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया।

महादेवशाल मंदिर पश्चिमी सिंहभूम जिले के प्रमुख धार्मिक और आस्था के केंद्रों में शामिल है। सावन के महीने में यहां जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलार्पण के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा और सुविधा को लेकर विशेष व्यवस्था की जा रही है।

उपायुक्त के निरीक्षण के दौरान गोपनीय प्रभारी कुमार हर्ष, गोईलकेरा प्रखंड विकास पदाधिकारी विवेक कुमार, थाना प्रभारी विक्रांत मुंडा सहित मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर उपायुक्त को जानकारी दी।

इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित दर्शन-पूजन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों और मंदिर समिति के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।

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