जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे निर्मल महतो की शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को स्मरण किया गया तथा झारखंड के विकास और आम लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर किए गए उनके कार्यों को रेखांकित किया गया।
मानवाधिकार सहयोग संघ की महिला ज़िला अध्यक्ष चरनजीत कौर भाटिया ने निर्मल महतो को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने झारखंड के विकास के साथ-साथ आम लोगों के हितों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। जनसेवा के प्रति उनका समर्पण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव उन्हें अलग पहचान देता है।
उन्होंने कहा कि निर्मल महतो का राजनीतिक और सामाजिक योगदान लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा। उनके विचार, संघर्ष और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
झारखंड आंदोलन में अहम भूमिका
निर्मल महतो झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही वे ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के संस्थापक के रूप में भी जाने जाते हैं।
अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन में निर्मल महतो ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के अधिकार, सामाजिक सरोकार और झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनसरोकारों के कारण वे झारखंड आंदोलन की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम बने।
निर्मल महतो की 8 अगस्त 1987 को जमशेदपुर में हत्या कर दी गई थी। उनकी शहादत के बाद उन्हें झारखंड आंदोलन के एक प्रमुख शहीद के रूप में याद किया जाने लगा। हर वर्ष उनकी शहादत दिवस पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान निर्मल महतो की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और झारखंड के लिए उनके संघर्ष, जनसेवा तथा योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।

