चाईबासा: पूर्व रांची लोकसभा और ईचागढ़ विधानसभा प्रत्याशी तथा एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कठोर कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी और सख्त कार्रवाई ही परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने का स्थायी उपाय है।
रामहरि पेरियार ने कहा कि परीक्षा में नकल, अनुचित साधनों के इस्तेमाल, पेपर लीक या संगठित धांधली में दोषी पाए जाने वाले उम्मीदवारों को कम से कम 10 वर्षों के लिए देशभर की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोष सिद्ध होने के बाद सभी संबंधित भर्ती और परीक्षा संस्थाओं पर अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा से ही इस तरह की कठोर व्यवस्था लागू करने की शुरुआत होनी चाहिए। परीक्षा की शुचिता से समझौता करने वालों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
रामहरि पेरियार ने कहा कि यदि 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने की आवश्यकता पड़ती है तो पूरी प्रक्रिया कानून के प्रत्येक पहलू को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी और मजबूत तरीके से पूरी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षा माफिया या संगठित गिरोह कानूनी खामियों का सहारा लेकर कार्रवाई को कमजोर न कर सके।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में धांधली केवल कुछ छात्रों की गलती का मामला नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डालता है। ऐसे मामलों में बड़े आर्थिक और स्वार्थी हित जुड़े हो सकते हैं। इसलिए जांच और कार्रवाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
रामहरि पेरियार ने सरकार और संबंधित परीक्षा आयोग से दोषियों की पहचान, निष्पक्ष जांच, डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के संरक्षण तथा दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने 14वीं जेपीएससी सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट, कठोर और राष्ट्रव्यापी नीति लागू करने की मांग की, ताकि परीक्षा माफिया और उनके नेटवर्क पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाया जा सके।

