चाईबासा: विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर एसजे डीएवी पब्लिक स्कूल, चाईबासा में हंसराज सदन की अगुवाई में सीबीएसई और झारखंड सरकार के मार्गदर्शन में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोकभाषा, संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से विविधता में एकता तथा प्रकृति के प्रति आदिवासी समाज के गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य-सह-एआरओ ओपी मिश्रा ने भारत और झारखंड की विविधतापूर्ण संस्कृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। आदिवासी समाज का प्रकृति प्रेम, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा अपनी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण की भावना सभी के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
विद्यालय की शिक्षिका विजय लक्ष्मी बास्के ने भी आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति और प्रकृति के साथ उसके आत्मीय संबंध पर अपने विचार रखे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में कक्षा 11वीं की छात्राओं ने आकर्षक आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। विद्यालय के संगीत समूह के विद्यार्थियों ने ‘हमर झारखंड’ गीत प्रस्तुत कर झारखंड की माटी और संस्कृति के प्रति गौरव की भावना व्यक्त की।
कक्षा तीसरी की छात्रा रिया तिग्गा ने कुड़ुख भाषा में भजन प्रस्तुत किया। परिणय पूर्ति और नम्रता ने हो भाषा में मधुर संगीत प्रस्तुत किया। वहीं साक्षी किरण और अरिल होन्हागा ने हो भाषा में प्रेरणादायी उद्धरण प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को झारखंड की जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से परिचित कराया गया। साथ ही विद्यालय परिसर में स्थानीय लोकभाषाओं, लोककला और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करने का संदेश दिया गया।

