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Fri. Jul 31st, 2026

सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ने मैग्नेट पुनर्चक्रण तकनीक उद्योग को सौंपी, दुर्लभ मृदा तत्वों के पुनर्प्राप्ति को मिलेगा बढ़ावा

जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर ने शुक्रवार को रायपुर स्थित अर्थ इंडियन रिसोर्सेज लिमिटेड के साथ मैग्नेट पुनर्चक्रण तकनीक के हस्तांतरण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस तकनीक के माध्यम से उपयोग के बाद अनुपयोगी हो चुके मैग्नेटों से दुर्लभ मृदा तत्वों की पुनर्प्राप्ति कर उन्हें दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। यह पहल देश के राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को मजबूती देने के साथ-साथ दुर्लभ मृदा तत्वों की आत्मनिर्भर और सतत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रयोगशाला द्वारा हस्तांतरित यह तकनीक एनडीएफईबी मैग्नेट स्क्रैप से उच्च शुद्धता वाले दुर्लभ मृदा ऑक्साइड प्राप्त करने के लिए विकसित की गई है। इस प्रक्रिया के माध्यम से पवन ऊर्जा संयंत्रों, विद्युत वाहनों तथा विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले पुराने और अनुपयोगी मैग्नेटों से नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम तथा डिस्प्रोसियम जैसे बहुमूल्य दुर्लभ मृदा तत्वों का पुनर्चक्रण किया जा सकेगा।

इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसमें कम ऊर्जा की आवश्यकता वाली ऊष्मीय उपचार प्रक्रिया के बाद जल लीचिंग विधि अपनाई जाती है, जिससे प्रबल खनिज अम्लों के उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम होता है और पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित तथा ऊर्जा-कुशल बनती है। इस प्रक्रिया के दौरान आयरन ऑक्साइड भी एक उपयोगी सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, जिससे तकनीक की उपयोगिता और बढ़ जाती है।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह में अर्थ इंडियन रिसोर्सेज लिमिटेड की ओर से ऋषि राज नारंग, योगेन्द्र नारंग और दुष्यंत दास उपस्थित रहे। वहीं सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला की ओर से डॉ. एस. शिवप्रसाद, डॉ. एस. के. पाल, डॉ. के. के. साहू, डॉ. अभिलाष, डॉ. नवनीत सिंह रंधावा, डॉ. प्रतिमा मेश्राम, डॉ. वाई. उषा, डॉ. उदय भास्कर राव तथा डॉ. बीना कुमारी ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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