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डिमना लेक में दो डॉक्टरों की मौत पर गहराया रहस्य, परिजनों ने दर्ज कराई एफआईआर, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र स्थित डिमना लेक में दो युवा डॉक्टरों की डूबने से हुई मौत का मामला अब संदेह के घेरे में आ गया है। मृतक डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल के परिजनों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है। डॉ. सक्षम सिंह के पिता पलामू जिले के तरहसी निवासी सत्येंद्र कुमार सिंह ने बोड़ाम थाना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए पूरे मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। डॉ. समीर लाल के पिता अजय लाल ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि घटना की हर पहलू से जांच होनी चाहिए ताकि दोनों युवकों की मौत की असली वजह सामने आ सके।

सत्येंद्र कुमार सिंह ने अपने आवेदन में बताया कि 24 जुलाई की सुबह उन्हें डॉ. सचिन का फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनका पुत्र सक्षम सिंह और उसके मित्र डॉ. समीर लाल डिमना लेक में डूब गए हैं। सूचना मिलने के बाद परिवार तत्काल जमशेदपुर पहुंचा, जहां एमजीएम अस्पताल में उन्हें बेटे की मौत की पुष्टि हुई। बाद में जानकारी मिली कि घटना वाली रात करीब ढाई से तीन बजे के बीच सक्षम, समीर और उनके साथी डॉ. यश एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल से समीर की कार से डिमना लेक घूमने गए थे। बताया गया कि रेडियल फाटक के पास गहरे पानी में पहले सक्षम का पैर फिसला और वह डूबने लगा। उसे बचाने के लिए समीर भी पानी में उतरा, लेकिन वह भी गहरे पानी में समा गया। डॉ. यश के अनुसार उसने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने वॉयस कमांड से अपने मोबाइल से डॉ. सचिन को फोन कर घटना की जानकारी दी और बाद में सुरक्षा गार्ड तथा पुलिस को सूचना दी।

हालांकि मृतक के पिता ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सक्षम पहले एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हो चुका था, जिससे उसके एक हाथ की कार्यक्षमता पूरी तरह सामान्य नहीं रही थी। ऐसे में उसका गहरे पानी में उतरना उन्हें स्वाभाविक नहीं लगता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. यश का सक्षम और समीर के साथ पहले भी कई बार विवाद हो चुका था और घटना वाली रात भी तीनों के बीच कहासुनी हुई थी।

परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, आपसी बातचीत, इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच, एफएसएल रिपोर्ट तथा अन्य वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि घटना के समय मौजूद सभी लोगों के बयान दर्ज कर उनका तकनीकी साक्ष्यों से मिलान किया जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति की लापरवाही या आपराधिक भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। परिजनों ने कहा कि उन्हें झारखंड पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भरोसा है तथा वे केवल अपने पुत्रों की मौत की वास्तविक सच्चाई सामने लाना चाहते हैं।

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