जमशेदपुर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शनिवार को नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एवं कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कारगिल युद्ध के वीर योद्धा माणिक बारदा रहे, जिनका विश्वविद्यालय परिवार ने शॉल और पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मान किया। इस दौरान कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विद्यार्थियों को राष्ट्रसेवा तथा अनुशासित जीवन का संदेश दिया गया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का संघर्ष और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनसे नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा की सीख लेनी चाहिए।
मुख्य अतिथि माणिक बारदा ने अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सीमा पर तैनात सैनिकों का सबसे बड़ा मनोबल देशवासियों का विश्वास और समर्थन होता है। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। कुलसचिव नागेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 50 पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। आशु भाषण, पोस्टर मेकिंग और पुस्तिका निर्माण प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डीन अकादमिक अभिनव कुमार, डीन रिसर्च डॉ. ईशिता घोष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष दीपिका कुमारी, भूगोल विभागाध्यक्ष एवं एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी मौसमी मुर्मू, अवनी सहाय सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और राष्ट्र निर्माण की सामूहिक प्रतिज्ञा के साथ हुआ।

