सेन्हा/लोहरदगाः लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के कुंदगढ़ी मोड़ के समीप बुधवार को सड़क हादसे में दंपती की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने लोहरदगा-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) को घंटों जाम कर दिया। ग्रामीण मृतक परिवार के चार अनाथ बच्चों के लिए तत्काल मुआवजा और सरकारी सहायता की मांग कर रहे थे। प्रशासन के आश्वासन के बाद जाम हटाया गया और यातायात बहाल हुआ।
जानकारी के अनुसार, सेन्हा निवासी गुरुदत्त उरांव (42) और उनकी पत्नी लक्ष्मी उरांव (38) मंगलवार को गुमला जिले के प्रसिद्ध आंजन धाम से स्कूटी से लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में एक मवेशी को बचाने के प्रयास में स्कूटी अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर गुमला पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और देर शाम परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया। इस दर्दनाक हादसे ने परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। दंपती के पीछे चार बच्चे—खुशबू उरांव (20), पुनिता उरांव (16), शैलेश उरांव (15) और पूजा उरांव (12)—अनाथ हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है और परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा है। इसी कारण ग्रामीण शव के साथ सड़क पर उतर आए और तत्काल मुआवजा व सरकारी सहायता की मांग को लेकर एनएच जाम कर दिया। जाम की सूचना मिलते ही सेन्हा थाना प्रभारी नीरज झा और प्रखंड विकास पदाधिकारी संग्राम मुर्मू मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और पीड़ित बच्चों से बातचीत कर उन्हें हरसंभव सरकारी सहायता दिलाने का भरोसा दिया। बीडीओ की पहल पर अंतिम संस्कार के लिए तत्काल ₹10 हजार की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई, जबकि थाना प्रभारी ने बच्चों की शिक्षा में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने घंटों बाद सड़क जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद लोहरदगा-गुमला मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। प्रशासन ने कहा कि पीड़ित बच्चों की स्थिति अत्यंत संवेदनशील है और उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों ने यह भी कहा कि अपनी मांगों को लेकर सड़क जाम करना उचित नहीं है और कानून को हाथ में लेने से बचना चाहिए।

