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हिमांशु सिंह हत्याकांड: परिवार की सहमति के बिना आंदोलन उचित नहीं, सिख समाज ने राजनीतिक दलों से मशाल जुलूस और बंद पर पुनर्विचार की अपील

जमशेदपुर: हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर गुरुवार को मानगो में झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी और सिख समाज आंदोलन समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में हत्या के बाद की परिस्थितियों, प्रशासनिक कार्रवाई, पोस्टमार्टम, अंतिम संस्कार और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता कमिटी के महासचिव बलजीत सिंह ने की।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि हिमांशु सिंह की हत्या ने पूरे शहर और समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। वक्ताओं ने कहा कि घटना के बाद से अब तक लोगों के लिए इस घटना पर विश्वास कर पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक पीड़ा उस परिवार पर बीत रही है जिसने अपना बेटा, पति और परिवार का सदस्य खो दिया है। ऐसे समय में किसी भी निर्णय से पहले परिवार की भावनाओं और इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए।

बैठक को संबोधित करते हुए सिख समाज आंदोलन समिति के अध्यक्ष एवं झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी के सीनियर एडवाइजर अवतार सिंह भाटिया ने कहा कि घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी कराई। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह की तत्परता घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा दिखाई जाती तो संभवतः हिमांशु सिंह की जान बचाई जा सकती थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब हिमांशु अपनी जान बचाने के लिए पुलिस वाहन तक पहुंचे थे, तब उन्हें समय पर सुरक्षा नहीं मिल सकी। उनका कहना था कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि घटना के दौरान कई मीडिया कर्मियों ने तत्कालीन एसएसपी पीयूष पांडे से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि उस समय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तत्काल आवश्यक निर्देश दिए जाते तो हालात कुछ अलग हो सकते थे। समिति ने इसे पुलिस तंत्र की गंभीर लापरवाही बताते हुए इसकी भी जांच की मांग की।

हालांकि समिति ने यह भी माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों जिलों के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, बिष्टुपुर थाना प्रभारी समेत घटना के समय ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। बैठक में कहा गया कि यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि हिमांशु सिंह के परिजनों द्वारा प्रशासन के समक्ष रखी गई अधिकांश मांगों पर कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। ऐसे में यदि स्वयं परिवार फिलहाल किसी आंदोलन, मशाल जुलूस या बंद के पक्ष में नहीं है, तो केवल राजनीतिक कारणों से इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना उचित नहीं होगा।

सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में हिमांशु सिंह का परिवार किसी आंदोलन का निर्णय लेता है या उसका समर्थन करता है, तो दोनों संगठन पूरी मजबूती के साथ परिवार के साथ खड़े रहेंगे। लेकिन परिवार की सहमति के बिना किसी भी राजनीतिक दल या संगठन द्वारा आंदोलन चलाना समाज की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

बैठक में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल रघुवर दास समेत सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से अपील की गई कि वे वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रस्तावित मशाल जुलूस और जमशेदपुर बंद पर पुनर्विचार करें। समिति ने कहा कि फिलहाल सरकार और प्रशासन को चल रही कार्रवाई पूरी करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।

संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगे की जांच या कार्रवाई में किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित होती है, तो सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी स्वयं आंदोलन का नेतृत्व करेंगी और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी देने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

बैठक के अंत में हिमांशु सिंह की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने उनकी आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगे की रणनीति झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी और सिख समाज आंदोलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सार्वजनिक की जाएगी।

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