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मई में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, खाड़ी तनाव और कच्चे तेल की महंगाई का असर, झारखंड-बिहार में बढ़ी लोगों की परेशानी

जमशेदपुर/रांची : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत में भी तेजी से दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सोमवार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी गई। मई महीने में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने फ्यूल के दाम बढ़ाए हैं। लगातार हो रही बढ़ोतरी से झारखंड और बिहार समेत पूरे देश में आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।

तेल कंपनियों की ओर से जारी नए रेट के अनुसार इस बार पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये तथा डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

झारखंड में भी पेट्रोल-डीजल के दामों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रांची में पेट्रोल 105.24 रुपये प्रति लीटर और डीजल 100.37 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। जमशेदपुर, चाईबासा, सरायकेला, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग समेत कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। वहीं बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार 15 मई को पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमत में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके बाद 19 मई और 23 मई को भी लगभग 90-90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए। अब 25 मई को फिर से बढ़ोतरी होने के बाद केवल 10 दिनों के भीतर चार बार फ्यूल प्राइस बढ़ चुका है। इससे वाहन चालकों और आम लोगों का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित होने लगा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के पीछे खाड़ी देशों में जारी संघर्ष, तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी प्रमुख कारण हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। यदि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब आम जीवन पर भी दिखने लगा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर सब्जी, फल, दूध, राशन, निर्माण सामग्री और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने भाड़ा बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।

जमशेदपुर और रांची में ऑटो चालकों तथा छोटे वाहन संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण उनकी कमाई पर असर पड़ रहा है। कई लोगों ने बताया कि रोजाना पेट्रोल और डीजल भराने में पहले की तुलना में काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जबकि आमदनी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि रसोई गैस, खाद्य सामग्री और बिजली के बढ़ते खर्च के बीच अब वाहन चलाना भी महंगा होता जा रहा है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और अब सभी की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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