जमशेदपुर : बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सुवर्ण वर्णिक समाज के प्रदेश, जिला एवं विभिन्न शाखा कमेटियों के संयुक्त तत्वावधान में बाराद्वारी स्थित भवन में श्री श्री मां बाघेश्वरी देवी की भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्ति के माहौल से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः स्वर्णरेखा नदी घाट से पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई, जहां से समाज के लोग कलश यात्रा के रूप में पूजा स्थल तक पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाते हुए वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद विधिवत मंत्रोच्चार के साथ मां बाघेश्वरी देवी की पूजा संपन्न हुई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक पूर्णिमा साहु ने मां बाघेश्वरी देवी के समक्ष समाज के हर परिवार को विपत्तियों से बचाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि समाज की एकता और सहयोग ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। साथ ही उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनने और बच्चों को शिक्षित करने की अपील करते हुए सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में साकची महिला थाना प्रभारी रूपा पाल, सोनारी थाना प्रभारी मधुसूदन दे, आनंद बिहारी दुबे, विकास सिंह, प्रदेश अध्यक्ष संजय पोद्दार, प्रदेश सचिव दीपक दत्ता, जिला अध्यक्ष रवि मांझी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रदेश कमेटी के संरक्षक विश्वनाथ चंद्र, गोपाल दत्त, समीर दत्त, डॉ. के.एल. पाल, संजय दत्ता, सनोज चंद्र समेत सभी आठ शाखाओं के पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। बच्चों के लिए खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जबकि महिलाओं के बीच चियर रेस और जलेबी रेस जैसे कार्यक्रमों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। समाज की विभिन्न शाखाओं द्वारा किए गए रक्तदान कार्यों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें भुईयाडीह शाखा को 135 यूनिट रक्तदान के लिए प्रथम स्थान, निर्मल नगर शाखा को 102 यूनिट के साथ द्वितीय और मानगो शाखा को 70 यूनिट के साथ तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का संचालन कंचन दत्ता ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के सदस्य, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और भी बढ़ गई।
आयोजकों ने बताया कि मां बाघेश्वरी देवी की प्रतिमा का विसर्जन रविवार की शाम पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

