*रांची:* राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार की गई विशेष बल झारखंड जगुआर के गठन को 19 फरवरी 2026 को 18 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
स्थापना दिवस के अवसर पर झारखंड जगुआर अपने उन तमाम शहीद जवानों को नमन कर रहा है जिन्होंने नक्सलियों से लोहा लेते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
परिजनों तक पहुंचे अफसर, शहीद परिवारों का सम्मान
स्थापना दिवस से पूर्व, झारखंड जगुआर के अधिकारियों ने शहीद जवानों के परिजनों से उनके गृह जिलों में जाकर मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया।
अधिकारियों ने शहीद परिवारों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिन्ह और उपहार भेंट कर श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान पुलिस पदाधिकारियों ने परिवारजनों से हालचाल पूछा और भरोसा दिलाया कि झारखंड जगुआर शहीदों के बलिदान को हमेशा याद रखेगा तथा उनके परिवारों के साथ हर संभव सहयोग के लिए तत्पर रहेगा।
18 वर्षों में 24 जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
पिछले 18 वर्षों में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान 24 वीर जवानों और पदाधिकारियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।
उनके अदम्य साहस और समर्पण ने राज्य में शांति और विकास का नया माहौल स्थापित किया है।
स्थापना दिवस के मुख्य समारोह में शहीद जवानों की स्मृति में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें उनके योगदान को याद किया जाएगा।
“शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा” — अनूप बिरथरे, आईजी जगुआर
झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे ने कहा कि
“शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
हम राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प को और मजबूत करेंगे।”
उन्होंने बताया कि झारखंड जगुआर का गठन 19 फरवरी 2008 को किया गया था, जब राज्य नक्सली हिंसा की गंभीर चुनौती से जूझ रहा था।
इन वर्षों में बल ने सैकड़ों सफल अभियानों के ज़रिए नक्सलवाद को कमज़ोर किया है।
शहीद जवानों में कई ऐसे थे जिन्होंने लातेहार, गुमला, खूंटी, और सरायकेला-खरसावां जैसे संवेदनशील जिलों में अपने प्राण न्योछावर किए।

