लातेहार: लातेहार के सदर प्रखंड के मनन चोटाग में एक विवादास्पद मामले ने तूल पकड़ लिया है, जहां एक व्यक्ति ने ज़मीन पर जबरन कब्जा कर घर बना लिया है।पीड़ित महिला का कहना है कि इस भूमि पर उनके कानूनी अधिकार थे, लेकिन बिना किसी अनुमति के इस पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कर लिया गया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।पीड़ित महिला ने मामले की जांच और न्याय की मांग करते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई की अपील की है।
क्या है,मामला: लातेहार के सदर प्रखंड के मनन चोटाग के रहने वाली मालती चौधरी ने रैयती ज़मीन से अवैध कब्ज़ा हटाने की माँग को लेकर पिछले पाँच वर्षों से न्याय की आस में कभी ज़िले के उपायुक्त तो कभी पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के चक्कर लगा रही है।लेकिन उनकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी। थक-हार कर पीड़ित महिला ने कहा, “क्या सभी बिक चुके हैं?”
ज़िले के सदर प्रखंड के
प्लॉट नंबर-6/11000 जो मेरे पिता को बंदोबस्ती नंबर-626/1950-1951 में प्राप्त था।जिसका आरएएस० खाता संख्या 160,प्लॉट-418,2037 रक़बा 10 डिसिमल है।जिसपर संजय सोनी द्वारा ग़लत तरीक़े से कब्ज़ा कर मकान बनाया जा रहा है।
पुलिस और उपायुक्त से नहीं मिला न्याय, पीड़ित परिवार ने की उच्च अधिकारियों से गुहार
सदर प्रखंड की रहने वाली मालती चौधरी के पीड़ित परिवार न्याय की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर है। परिवार का आरोप है कि उन्होंने ज़मीन से संबंधित मामले को लेकर कई बार पुलिस और उपायुक्त से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवार का आरोप:
मामला एक संपत्ति विवाद का है, जिसमें परिवार ने स्थानीय अधिकारियों से न्याय की अपील की थी। हालांकि, हमारी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। न्याय की आस में हम थक चुके हैं। अब उच्च अधिकारियों और अदालत की शरण लेने का फैसला किया है।
अभिषेक चौधरी(पीड़ित युवती के पुत्र)
क्या न्याय मिलना मुश्किल हो चुका है?
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आम जनता को न्याय के लिए इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तो यह कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
परिवार ने उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की है और न्याय की गुहार लगाई है, ताकि उनके साथ हुए अन्याय का निराकरण हो सके।
पीड़ित महिला ने राजधानी न्यूज़ से अपनी आपबीती में बताई:
इस लंबे संघर्ष के बावजूद, परिवार को न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।हम अपनी व्यथा को मीडिया के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया है, ताकि हमारी आवाज़ उच्च अधिकारियों तक पहुंचे और हमें हमारा हक़ दिलाया जा सके।
(मालती चौधरी पीड़ित महिला)
इस मामले ने स्थानीय समुदाय में भारी नाराजगी पैदा कर दी है, और लोग प्रशासन से पीड़ितों के लिए तुरंत न्याय सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

