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संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में ‘ लोयोला डेजेड हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में ‘ लोयोला डेजेड हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट

संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ के सभागार में संत एग्नाशियुस लोयोला का पुण्यतिथि मनाया गया। कार्यक्रम का शुरुआत संत लोयोला की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन साथ ही संत जेवियर्स कॉलेज का अपना कॉलेज एंथम गाकर किया गया। फादर डॉ. एम के जोस के नेतृत्व में मिस्सा पूजा भी किया गया। जिसमें सभी शिक्षक कर्मचारी और विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

ज्ञात हो कि 1541 ई. को संत एग्नाशियुस लोयोला के द्वारा सोसाइटी ऑफ जीजस का स्थापना किया गया था। सोसाइटी समस्त मनुष्यों के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिकता का प्रसार करने का काम करती है। भारत के साथ ही विश्व के 96 देशों में इस संस्था के द्वारा सैकड़ों स्कूल, कॉलेज और मानव सेवा के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। संत एग्नाशियुस लोयोला का देहांत 31 जुलाई 1556 ईस्वी को हुआ था। इस समाज के लोग और संस्थाएं इस दिन को प्रतिवर्ष ‘ लोयोला दिवस’ के रूप में मनाते हैं साथ ही मानवता और समाज के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों और विचारों को समाज में पहुंचाने का प्रयास करते हैं। संत लोयोला ने कहा था कि मनुष्य को इससे क्या लाभ जब वह सारा संसार कमा ले लेकिन अपनी आत्मा गवा दे। पूरे संसार के जेसुईटस इसी वाक्य को अपनी समर्पित सेवा में जीवंत कर रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्र संघ प्रमुख एल्विन लकड़ा ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों के नेतृत्व में विद्यार्थियों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। प्रो नेहा मिंज और शालिनी बाड़ा नेतृत्व में विद्यार्थियों ने स्वागत गान और नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संत लोयला के जीवन दर्शन को नाइट मंचन के माध्यम से पेश किया गया। रंगा- रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम असमिया नृत्य, डांडिया नृत्य, संथाली नृत्य, दक्षिण भारतीय नृत्य, बॉलीवुड तड़का के माध्यम से भारत की भाषा एवं संस्कृति की विविधता और एकता की छटा देखने को मिली। पूरा महाविद्यालय परिसर में हर्ष और उल्लास का माहौल था।

इस अवसर पर प्राचार्य फादर डॉ. एम के जोस ने संबोधित करते हुए संत लोयोला के जीवन और उपदेश पर प्रकाश डाला साथ ही छात्रों को उनके उपदेशों को अपनाने और समाज के विकास में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक ऐसा साधन है जिससे व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण के ध्येय को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हम जेसुईट अनुयायियों का उद्देश विनम्रता से मानव सेवा में तत्पर रहना और समाज में प्रेम एवं सेवा भावना को फैलाना है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन और संचालन के लिए फादर साइमन मुर्मू ने महाविद्यालय के प्राचार्य फादर डॉ. एम के जोस, कल्चरल कमेटी के कोऑर्डिनेटर प्रो. क्रिती मिंज, सभी विभागों के प्राध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, मीडिया के बंधुओं और छात्र- छात्राओं को हृदय से धन्यवाद किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रदर संजय मार्टिन, सिस्टर जॉली, सि. चंद्रोदया,प्रो. मैक्सेंसियस कुजूर, अमृत मिंज, जफर इकबाल, रोज एलिश, बिऊला भेंगरा, मनीषा बाखला, रश्मी सुमन, अंजना एक्का, एक्विना टोप्पो, शेफाली प्रकाश, बिनोद कुजूर, अभय सुकूट, शशि शेखर, रीमा रेणु, आलिया नदीम, सुरभि सिन्हा, डॉ.प्यारी कुजूर, एस सी सामंत, सुबोध मिंज और राजीव कुमार उपस्थित थे।

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