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मिट्टी जांच केंद्र पर रखे उपकरण फांक रहें धूल, प्रयोगशाला तो बना पर 10 वर्ष बाद भी तकनीशियन की नियुक्ति नहीं।

मिट्टी जांच केंद्र पर रखे उपकरण फांक रहें धूल,

प्रयोगशाला तो बना पर 10 वर्ष बाद भी तकनीशियन की नियुक्ति नहीं।

महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट

प्रखंड महुआडांड़ के किसानों की आय दोगुनी हो, किसान खुशहाल जिंदगी जी सके इसके लिए रामपूर स्थित कृषि फार्म में 15 लाख रूपय खर्च कर 2012-13 में एक भवन का निर्माण कर मिट्टी जांच केंद्र की स्थापना कराई गयी. लेकिन एक दशक बीत जाने को है, फिर भी प्रखंड के किसानों को इससे अभी तक कोई फायदा नहीं मिला. लब्बो-लुआब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी योजना के नाम सिर्फ पैसे खर्च करने से मतलब रखते है, प्रयोगशाला के नाम पर लाखो का भवन बना, उपकरण की व्यवस्था हुई,मगर तकनीशियन नियुक्ति करना शायद विभाग भूल गया. अब कृषि फार्म स्थित मिट्टी जांच केंद्र मे रखे उपकरण 10 साल से धूल फांक रहे है, केंद्र भवन खंडहर मे तब्दील हो गया है. केंद्र का संचालन होने से निश्चित तौर पर इसका लाभ किसान को मिलता।

 

 

 

*इसलिए जरूरी है मिट्टी परीक्षण*

 

कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, किसी पौधा की पूर्ण वृद्धि के लिए 16 पोषण तत्व की आवश्यक होती हैं. इस 16 तत्वों में एक भी कमी होने पर पौधे पर दुष्प्रभाव देखने को मिलता है. मिट्टी में किसी विशेष पोषक तत्व की अधिकता या कमी हो सकती है, जो फसल वृद्धि व पैदावार पर प्रभाव डालती है. इसलिये मिट्टी का परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण व पहला कदम है. इसलिए परिस्थितियों में फसलोंं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है, खेत की मिट्टी का परीक्षण कराया जाए, परिणामों के आधार पर उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा का संतुलित रूप में उपयोग किया जाए. जिससे खेतो में किसान बिना जांच के सिर्फ खाद ही न डाले, बल्कि उचित मात्रा में उचित खाद का प्रयोग करे।

*क्या बोलते है किसान*

 

कृषक तहाबूल हक ने कहा कि सिंचाई की व्यवस्था नहीं रहने कारण प्रखंड के किसान केवल वर्षा एवं भगवान भरोसे पूरे साल में एक बार खरीफ की फसल करते हैं. ज्यादातर धान खेती की जाती है. जहां पानी का साधन है, वहा कुछ बहुत रवि फसल भी होती है, लेकिन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला का सुरू नही होना दुर्भाग्य की बात है. किसान जोगिन्दर बखला, केशवर प्रसाद, नसीमुद्दीन, गुप्तेश्वर सिंह, सफरूल अंसारी, बलकू किसान, राजेन्द्र नगेसिया, समेत अन्य ने कहा यदि मिट्टी परीक्षण होता तो जांच कराकर किसान बीज और खाद डालते, परन्तु हमलोग अपने खेतों में खाद एक दूसरे की देखा देखी डालते हैं, पारम्परिक रूप से ही खेती होती है, हर साल फसल का उत्पादन बढऩे की बजाय घटता जाता है।

 

*क्या बोलते है अधिकारी*

 

जिला कृषि पदाधिकारी राम शंकर सिंह ने कहा विभाग में तकनीशियन एवं कर्मचारीयों की कमी है, इसी कारण मिट्टी जांच केंद्र महुआडांड़ चालू नही हो पाया, जिला मुख्यालय में लाकर मिट्टी जांच कि जाती है।

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