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महुआडांड़ में 17 रमजान को हुआ खत्मे तरावीह, अंजुमन कमेटी के द्वारा इमाम साहब को दिए गए तोहफ़े।

महुआडांड़ में 17 रमजान को हुआ खत्मे तरावीह, अंजुमन कमेटी के द्वारा इमाम साहब को दिए गए तोहफ़े।

महुआडांड़ स्थित जामिया नूरिया से अवस्था में 17 रमजान दिन सोमवार को खत्मे तरावीह अदा की गई। यह तरावीह की नमाज जामिया नूरिया जियाउल इस्लाम के मोहतमिम मौलाना सऊद आलम मिस्बाही के द्वारा बहुत ही उम्दा अंदाज में पढ़ाया जा रहा था।जिसे लेकर सैकड़ों लोग मस्जिद पहुंचकर तरावीह की नमाज अदा कर रहे थे। तरावीह की नमाज में कुरान शरीफ के तीस पारे को बगैर देखे इमाम के द्वारा पढ़ाई जाती है। यह तरावीह रोजे के दिनों में पढ़ाई जाती है। खत्मे तरावीह को लेकर मस्जिद में ही महफिलें मिलादे पार् का प्रोग्राम रखा गया। इस प्रोग्राम में बाहर से आए उलमा के द्वारा कुरान शरीफ से क्या है,इसके पढ़ने के क्या फायदे हैं,और एक शरीफ के तीस पारे को याद कर बगैर देखे पढ़ कर सुनाना यह बहुत ही सआदतमंदी की बात है।

 

वहीं दावते इस्लामी की सुलेमान अत्तारी के द्वारा दरूद शरीफ की फजीलत बयान की गई।दुरूद शरीफ पढ़ने के क्या फायदे हैं। उन्होंने कहा जब कोई बंदा एक बार दुरूद शरीफ पढ़ता है उसके लिए अल्लाह तबारक व ताला रहमत के 70 दरवाजे खोल देता है, 70 दर्जात बुलंद कर देता है, और 70 गुना माफ फरमाता है। इसके अलावे दरूद शरीफ पढ़ने के बहुत सारे फवाईद है। मौलाना गुलाम रब्बानी के द्वारा नात शरीफ के माध्यम से दरूद शरीफ पढ़ने से संबंधित बहुत ही खुबसूरत अंदाज़ में बताया गया। वहीं मोहम्मद शहजाद आलम के द्वारा अपने नात में हुजूर की शान में बयान करते हुए कहा गया की जो हो चुका है जो होगा हुजूर जानते हैं, कहां है अरसे मोअल्ला हुजूर जानते हैं, बरोजे हस्र सफात करेंगे चुन चुन कर, हर एक गुलाम का चेहरा हुजूर जानते हैं।

जिसके बाद इमाम साहब को महुआडांड़ अंजुमन कमेटी के द्वारा तोहफा के रूप में पैसे व कपड़े पेश किए गए। जिसके बाद सलातो सलाम पढ़ी गई और अंत में मौलाना सऊद आलम मिस्बाही के द्वारा दुआ किया गया। जिसके उपरांत उपस्थित लोगों के बीच शिरनी बांटी गई। इस तरह से तरावीह का प्रोग्राम खत्म हुआ। मौके पर फहीम अहमद, तनवीर अहमद, आजाद अहमद,हयूम अंसारी, अब्दुल जब्बार अंसारी, खुर्शीद आलम, रानू खान सफरूल खान जुबेर अहमद, समेत सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।

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