Tue. Jul 23rd, 2024

आस्था का महापर्व छठ चौथे दिन उदय मान सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ संपन्न।

महुआडांड़

लोक आस्था का महान पर्व चार दिवसीय पर्व छठ पूजा गुरूवार को सामापन हो गया. महुआडांड़ और नेतरहाट मे घाटों पर छठ की अद्भुत छठा बिखरी हुई नजर आई. लोकआस्था के इस महापर्व पर प्रखंड महुआडांड के छठ घाटो मे आस्था का जनसैलाब उमड़ा नजर आया. दिन बुधवार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष षष्ठी का, अवसर लोक महा पर्व छठ व्रत का समय संध्या 5-00 बजे भगवान भाष्कर को जल एवं दूध से संध्या अर्ग दिया गया. वही गुरुवार को व्रतियों ने नदी और तालाब में खड़े होकर उदीयमान (उगते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया.इस के साथ छठ पूजा सम्पन्न हुई।

 

प्रखंड के सभी घाटों पर व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया

 

रामपूर नदी समेत चटकपुर, बोहटा, हामी, राजडंडा, नेतरहाट के छठ घाटों पर काफी संख्या में व्रती और श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को उदयगामी अर्घ्य दिया.इस दौरान प्रखंड प्रशासन और स्थानीय हिन्दू महासभा महुआडांड़ के द्वारा श्रद्धालुओ की सुविधा के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए थे. रामपूर के घाट हो या चटकपूर गांव के या फिर पर्यटन स्थल नेतरहाट के हर जगह व्रतियों ने पूरी श्रद्धाभाव के साथ पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और छठ मैया से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की मन्नत भी मांगी.

 

सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था छठ पर्व।

 

छठ की शुरुआत सोमवार को नहाय-खाय के साथ हुई थी. मंगलावर को खरना हुआ. पर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया था और चौथे दिन यानी गुरूवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया, जिसके बाद घाटो मे प्रसाद वितरण भी हुआ. इन सबके बाद ही व्रती महिलाएं व्रत का पारण कि

 

छठ पर सूर्यदेव और उनकी बहन छठ मैया की उपासना का है महत्व।

 

पूजारी सर्वेश पाठक ने कहा बेहद पवित्र माने जाने वाले छठ पर्व पर सूर्यदेव और उनकी बहन छठ मैया की उपासना का बहुत महत्व है. छठ का व्रत काफी कठिन माना जाता है. 36 घंटे निर्जला व्रत रखने के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत पूर्ण हो जाता है. ये व्रत परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।

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