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इस्कॉन कदमा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जगन्नाथ प्रभु की स्नान यात्रा

स्नान यात्रा, श्री जगन्नाथ प्रभु का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन धार्मिक उत्सव है। यह प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान वेदी पर विराजमान किया जाता है और 108 पवित्र कलशों के जल से उनका महाभिषेक किया जाता है।

स्नान यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इस दिव्य स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग पंद्रह दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को अनवासर कहा जाता है, जब भक्तों को भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते। इसके पश्चात भगवान नवयौवन रूप में दर्शन देते हैं, जिसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है। इसी के बाद विश्वविख्यात रथ यात्रा का शुभारंभ होता है।

 

कदमा इस्कॉन स्नान यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्ति, समानता और लोककल्याण का संदेश देने वाला उत्सव है। इस अवसर पर हज़ारो श्रद्धालु कदमा इस्कॉन मंदिर पहुँचकर भगवान के दर्शन किए और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त किए वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

अंततः, स्नान यात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा की गौरवशाली धरोहर है। यह उत्सव श्रद्धालुओं को ईश्वर के प्रति प्रेम, सेवा और समर्पण का संदेश देता है तथा मानव जीवन में पवित्रता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।हज़ारो लोगो द्वारा हरे रामा हरे कृष्णा का उद्दघोस कर भक्तिमय माहौल में झूम उठे ।कार्यक्रम सुबह 4:30 बजे मंगल आरति से प्रारंभ हुआ 6:30 बजे कलश यात्रा 8:30 बजे दर्शन यात्रा और प्रभु का स्नान 11:30 बजे से प्रारंभ हुआ ।

हज़ारो शरद्धालु ने जगन्नाथ महाप्रभु का प्रसाद ग्रहण किया ।

प्रमुख रूप से इस्कॉन कदमा के तारकेश्वर जी, अमित कुमार, सुरेश सोंथालिया, संतोष अगरहरि, सवाँरमल शर्मा, दिलीप गोयल, नवीन श्रीवास्तव, विनोद शर्मा, पवन शर्मा, शिव सुंदर अग्रवाल, अनुराग, हर्ष बकरेवाल, विनोद अग्रवाल आदि उपस्थित थे ।

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