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चाईबासा में बाबूलाल मरांडी का राज्य सरकार पर हमला, बोले- डीएमएफटी फंड का सही उपयोग नहीं हुआ

चाईबासा। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को चाईबासा सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम जिले में डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड के उपयोग, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और उद्योगों की स्थिति सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।

मरांडी ने कहा कि पिछले लगभग दस वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम जिले को डीएमएफटी के तहत तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई, लेकिन खनन प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हो सका। उनका कहना था कि इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए था, लेकिन सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया।

उन्होंने कहा कि आज भी जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होती, रोजगार के अवसरों का अभाव है और बड़ी संख्या में युवा तथा महिलाएं रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

राज्य की औद्योगिक नीति पर सवाल उठाते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार नए निवेश और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि पहले से संचालित उद्योगों को भी बचाने में विफल रही है। उन्होंने झींकपानी स्थित उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार को बंद या संकटग्रस्त उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए।

उन्होंने सारंडा क्षेत्र के लोगों को वन अधिकार पट्टा देने में हो रही देरी का भी मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि खनन प्रभावित परिवारों को आज भी उचित मुआवजा और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष है।

बालू घाटों की नीलामी का उल्लेख करते हुए मरांडी ने कहा कि पिछले छह वर्षों से लघु खनिजों की नीलामी प्रक्रिया लंबित रहने के कारण अवैध उत्खनन को बढ़ावा मिला है। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गलत नीतियों के कारण कई लौह अयस्क खदानें बंद पड़ी हैं, जिसका असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देश की संघीय व्यवस्था राज्यों के अधिकारों का सम्मान करती है और केंद्र सरकार राज्य सरकार की अनुशंसा के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करती है। पेपर लीक के मामलों पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों में कार्रवाई की है, जबकि झारखंड में युवाओं से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

प्रेस वार्ता के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जनता को राज्य सरकार के कार्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने निर्णय लेने चाहिए।

प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुँवर गागराई, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जे.बी. तुबिड, पूर्व जिला अध्यक्ष संजय पांडे, जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुवा, सतीश पुरी सहित भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र नाथ ओझा ने किया।

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