जमशेदपुर: केरला समाजम मॉडल स्कूल में कंटेंट क्रिएशन और फिजिटल लर्निंग विषय पर दो दिवसीय प्रोफेशनल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चिरंजीत नाथ ने किया। प्रशिक्षण में जमशेदपुर समेत आसपास के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया और डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के तरीकों को समझा।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को फिजिटल लर्निंग के 8Cs और एस ए एम आर फ्रेमवर्क की जानकारी दी गई। इसके साथ ही दोनों फ्रेमवर्क को आपस में जोड़कर कक्षा शिक्षण में तकनीक के सार्थक इस्तेमाल पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीक का इस्तेमाल केवल कक्षा में डिजिटल उपकरण शामिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि इसके माध्यम से शिक्षण पद्धतियों में प्रभावी बदलाव लाया जाए।
दो दिनों तक चले कार्यक्रम में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। हैंड्स-ऑन गतिविधियों, समूह कार्य, चर्चा और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए प्रशिक्षण को इंटरैक्टिव बनाया गया। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और यह समझने का प्रयास किया कि प्रशिक्षण में सीखी गई अवधारणाओं को वास्तविक कक्षा परिस्थितियों में किस तरह लागू किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान 21वीं सदी के विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में आवश्यक बदलाव पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया कि वे छोटे-छोटे लेकिन उद्देश्यपूर्ण बदलावों के जरिए कक्षा में सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी और सहभागी बना सकते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। शिक्षकों ने चर्चा और सहयोगात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए अपने विचार और अनुभव साझा किए।
स्कूल प्रबंधन ने शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए CISCE के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही अकादमिक डायरेक्टर, प्रिंसिपल, हेडमिस्ट्रेस और वाइस प्रिंसिपल के प्रति भी आभार जताया गया, जिन्होंने शिक्षकों की ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के सुचारु संचालन में केरला समाजम मॉडल स्कूल की रजिस्ट्रार और इवेंट कोऑर्डिनेटर वृंदा सुरेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दो दिवसीय प्रशिक्षण का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि शिक्षा में बदलाव के लिए हमेशा बड़े स्तर के परिवर्तन जरूरी नहीं होते। कक्षा में किए गए छोटे और सोच-समझकर किए गए बदलाव भी विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। कार्यक्रम ने शिक्षकों को नई तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों को अपनाने, प्रयोग करने और लगातार सीखते रहने के लिए प्रेरित किया।

