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ग्राम सभा अधिकारों को लेकर पोटका के ग्रामीणों का प्रदर्शन, दुखनी सोरेन ने संभाला मोर्चा

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के रोहिणी बेड़ा, बड़ा झरनागीह, भाटिन और तिलाईटांड़ की संयुक्त ग्राम सभाओं ने मंगलवार को ग्राम सभा अधिकारों और पेसा अधिनियम के अनुपालन की मांग को लेकर जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड के वरिष्ठ आदिवासी नेता चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में करीब 300 ग्रामीण तीर-धनुष और पारंपरिक प्रतीकों के साथ उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित अंतिम आवेदन सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान दुखनी सोरेन ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। इस दौरान उन्होंने वाहन के बोनट पर चढ़कर भी प्रदर्शन किया, जिससे आंदोलन ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बड़ा झरनागीह स्थित मां रंकिनी मंदिर परिसर के सौंदर्याकरण, पर्यटन विकास और अन्य निर्माण कार्य ग्राम सभा की अनुमति और सहमति के बिना कराए जा रहे हैं, जो अनुसूचित क्षेत्रों में लागू पेसा अधिनियम और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

संयुक्त ग्राम सभाओं ने अपने आवेदन में कहा है कि इस मामले में पूर्व में कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक न तो निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही परियोजनाओं से संबंधित स्वीकृति, कार्यादेश, वित्तीय प्रावधान और ग्राम सभा की सहमति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की गई। ग्रामीणों का कहना है कि इससे क्षेत्र में असंतोष और अविश्वास का माहौल पैदा हो रहा है।

ग्राम सभा प्रतिनिधियों ने प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पेसा अधिनियम का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने तथा विवादित कार्यों की वैधानिकता की समीक्षा करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर वे व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। आवेदन पर चारों ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के हस्ताक्षर किए गए हैं।

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