जमशेदपुर। पूर्व मंत्री सह भाजपा नेता दुलाल भुईयां ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान को लेकर कांग्रेस द्वारा किए गए पुतला दहन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री द्वारा प्रयोग किए गए “वनवासी” शब्द का गलत अर्थ निकालकर कुछ लोग समाज में भ्रम और घृणा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
दुलाल भुईयां ने कहा कि “वनवासी” और “आदिवासी” दोनों शब्द भारतीय समाज और संस्कृति की पहचान हैं। इन शब्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इनके ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वनवासी शब्द उन समुदायों के लिए प्रयोग किया जाता रहा है, जिनका जीवन वन, प्रकृति और परंपराओं से जुड़ा रहा है, जबकि आदिवासी शब्द मूल निवासियों की पहचान को दर्शाता है। दोनों शब्दों का उद्देश्य समाज के उस वर्ग के सम्मान और गौरव को प्रकट करना है, न कि किसी की भावना को ठेस पहुंचाना।
पूर्व मंत्री ने कहा कि देश की जनजातीय संस्कृति भारत की सबसे समृद्ध धरोहरों में से एक है। जनजातीय समाज ने प्रकृति संरक्षण, संस्कृति और परंपराओं को बचाने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
दुलाल भुईयां ने कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थक पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए शब्दों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। कांग्रेस आदिवासियों को भड़का कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही है।इससे समाज में अनावश्यक विवाद पैदा होता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को बांटने की राजनीति बंद होनी चाहिए और सभी को मिलकर उनके अधिकार, सम्मान और विकास के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती आदिवासी वीरों और संस्कृति की भूमि रही है। यहां के लोग भाईचारे और सामाजिक समरसता में विश्वास रखते हैं। ऐसे में किसी भी शब्द को लेकर विवाद खड़ा कर समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

