चाईबासा : मधुमेह के क्षेत्र में किए गए शोध कार्य को लेकर चाईबासा के डॉ सौम्य सेनगुप्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उनके शोध कार्य को प्रमाणिक और तथ्यपरक मानते हुए प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका “बीएमसी एंडोक्राइन विकार” में प्रकाशित किया गया है। यह शोध “जीनियस स्टडी” के तहत प्रकाशित हुआ है।
इस उपलब्धि को चाईबासा सहित पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण माना जा रहा है। डॉ सौम्य सेनगुप्ता इस शोध कार्य में एक शोधकर्ता के रूप में शामिल रहे।
जानकारी के अनुसार “जीनियस स्टडी” भारत में मधुमेह की दवाओं और उनसे होने वाले मूत्र एवं जननांग संक्रमण से जुड़े सबसे बड़े वास्तविक अध्ययन में से एक है। इस अध्ययन में देश के 42 केंद्रों से 15 हजार 611 मरीजों के आंकड़ों को शामिल किया गया। यह अध्ययन डॉ एन. के. सिंह और उनकी टीम के नेतृत्व में पूरा किया गया।
बताया गया कि इस शोध में मधुमेह के उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं और उनके प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इस शोध को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान और साक्ष्य आधारित मधुमेह उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। आने वाले समय में इस शोध का उपयोग विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और शोध पत्रों में संदर्भ के रूप में किया जा सकेगा।
डॉ सौम्य सेनगुप्ता ने इस उपलब्धि पर कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान को वैश्विक मंच पर पहचान मिलना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह शोध वास्तविक भारतीय आंकड़ों पर आधारित है और इससे मधुमेह उपचार के क्षेत्र में नई जानकारी सामने आएगी।
इस उपलब्धि पर चाईबासा के लोगों, सह-शोधकर्ताओं और सहयोगियों ने खुशी जताई है।

