जमशेदपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आयोजित महिला स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के प्रथम दिन गुरुवार को आध्यात्मिक एवं बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रशिक्षुओं द्वारा भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी की प्रतिकृति पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं संवाद का दौर चला।
बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य प्रशिक्षक अवधूतिका आनंदसाधिका आचार्या ने कहा कि भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आकर्षण और बदलती जीवनशैली के कारण लोगों में मानसिक तनाव और अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति आत्मकेंद्रित होता जा रहा है, जिससे सामाजिक संबंध कमजोर हो रहे हैं और मानसिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक असमानता, सामाजिक विखंडन और नैतिक मूल्यों में गिरावट भी लोगों को हताशा और निराशा की ओर ले जा रही है। युवाओं में बढ़ती मानसिक बेचैनी और दिशाहीनता चिंता का विषय है। उन्होंने पतंजलि योगसूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अविद्या, अहंकार, आसक्ति, द्वेष और मृत्यु का भय मनुष्य के मानसिक तनाव के प्रमुख कारण हैं।
अवधूतिका आनंदसाधिका आचार्या ने कहा कि अष्टांग योग का नियमित अभ्यास मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। योग और साधना से शरीर एवं मन में संतुलन स्थापित होता है, जिससे व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि संतुलित और अनुशासित जीवनशैली ही मानसिक शांति और प्रसन्नता का आधार है।
कार्यक्रम में अवधूतिका आनंदप्रभा आचार्या, अवधूतिका आनंदप्रसन्न आचार्या, अवधूतिका आनंदस्नेहमया आचार्या तथा अवधूतिका आनंदलेखा आचार्या सहित अन्य महिलाओं ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

