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पोक्सो मामले में कड़ा फैसला: आरोपी को 20 साल का कठोर कारावास, 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा स्थित विशेष अदालत ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कठोर दंड समाज में सशक्त संदेश देने के लिए आवश्यक है।

यह मामला किरीबुरू थाना कांड संख्या-09/2024 से संबंधित है, जो 9 अप्रैल 2024 को दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा 4/6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। करमपदा निवासी दिलीप गुडिया (पिता–पियुस गुडिया) पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किरीबुरू पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन किया, जिसमें पीड़िता की मेडिकल जांच रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य गवाहों के बयान, तथा तकनीकी साक्ष्य शामिल थे। इन सभी तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मजबूत चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत की, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला सुदृढ़ हुआ।

मामले की सुनवाई चिल्ड्रेन केस संख्या-03/2024 के रूप में की गई। 6 मई 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम विनोद कुमार सिंह की अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में कठोर सजा ही न्याय का सही रूप है।

अदालत ने पोक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत आरोपी दिलीप गुडिया को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10,000 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि निर्धारित समयावधि में जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ सकता है।

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