गुमला। जिले में पशु तस्करी के खिलाफ ग्रामीणों की सजगता का बड़ा उदाहरण सामने आया है। बाइपास रोड स्थित अरमई गांव के समीप ग्रामीणों ने मवेशियों से ठसाठस भरे एक संदिग्ध ट्रक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि तस्करों ने ग्रामीणों को एक लाख रुपये का लालच देकर रास्ता देने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने पैसे का प्रस्ताव ठुकराते हुए मानवता और कानून का साथ चुना।
जब अरमई गांव के पास से गुजर रहे एक ट्रक पर ग्रामीणों को शक हुआ। ट्रक पर छत्तीसगढ़ का नंबर प्लेट लगा था और उसमें मवेशियों को अमानवीय तरीके से ठूंसकर भरा गया था। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए ट्रक को रोक लिया और उसकी जांच की, जिसमें बड़ी संख्या में गायें पाई गईं। मवेशियों की हालत काफी खराब थी, जिससे साफ था कि उन्हें लंबी दूरी तक बिना उचित देखभाल के ले जाया जा रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, यह मवेशी सिसई के रास्ते रांची ले जाए जा रहे थे और आगे इन्हें पश्चिम बंगाल भेजने की भी योजना थी। शक है कि इन मवेशियों को अवैध रूप से वध के लिए ले जाया जा रहा था। ट्रक चालक और उसमें सवार अन्य लोग मौके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक को कब्जे में लेकर उर्मी स्थित पुलिस टीओपी ले गई। पुलिस ने मवेशियों को ट्रक से उतारकर सुरक्षित किया और उनकी हालत को देखते हुए तत्काल देखभाल की व्यवस्था की गई। बाद में जिम्मेनामा के आधार पर सभी गायों को स्थानीय किसानों के बीच सौंप दिया गया, ताकि उनकी उचित देखभाल हो सके।
पुलिस ने मामले में अज्ञात तस्करों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और ट्रक के नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुट गई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस तस्करी गिरोह का नेटवर्क किन-किन इलाकों में फैला हुआ है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि ग्रामीण सतर्क रहें और प्रशासन को समय पर सूचना दें, तो इस तरह के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

