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Sun. Apr 26th, 2026

दलमा के गांवों में ‘शिकार परब’ को लेकर जागरूकता अभियान तेज, नाटक और संवाद से वन्यजीव संरक्षण का संदेश

जमशेदपुर। दलमा वन्यजीव अभयारण्य से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को पारंपरिक ‘शिकार परब’ के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। डीएफओ सबा आलम अंसारी के निर्देश पर चल रहे इस अभियान में स्थानीय लोगों को उनकी परंपराओं के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अभियान की शुरुआत 20 अप्रैल को मानगो स्थित वन विभाग सभागार में इको विकास समितियों की बैठक से हुई, जहां गीता थिएटर के कलाकारों ने “माटी की पुकार (जंगल है तो हम हैं)” नाटक का प्रभावशाली मंचन किया। इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जंगल और वन्यजीवों का अस्तित्व ही मानव जीवन की आधारशिला है। नाट्य दल गांव-गांव जाकर पहले गीत-संगीत से लोगों को आकर्षित करता है और फिर अभिनय के जरिए संरक्षण का संदेश देता है।

इसी क्रम में पटमदा के बेलटांड़ चौक पर आयोजित कार्यक्रम में अंचलाधिकारी डॉ. राजेंद्र कुमार दास, थाना प्रभारी विष्णुचरण भोगता और समाजसेवी विश्वनाथ महतो ने ग्रामीणों को संबोधित किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध शिकार कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, पारंपरिक पर्वों को प्रकृति के अनुकूल रूप में मनाने की अपील की गई।

वन्यजीव जीवविज्ञानी प्रसेनजीत सरकार और आकाश कुमार जयसवाल के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में गीता कुमारी, प्रेम दीक्षित, अभिषेक राजू सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा। वन विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रखे जा सकेंगे।

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