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Fri. Apr 24th, 2026

चतरा की ‘ममता’ ने तोड़ी रूढ़ियाँ—जब पुरुष पीछे हटे, तो नारी शक्ति ने संभाला पोस्टमार्टम का जिम्मा

चतरा : आमतौर पर पोस्टमार्टम हाउस का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक सिहरन पैदा हो जाती है। यह एक ऐसा काम माना जाता रहा है जिसे पुरुष प्रधान समाज का हिस्सा समझा जाता था। लेकिन चतरा से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि ‘नारी शक्ति’ की अदम्य साहस की कहानी भी कहती है। जहाँ अस्पताल के अनुभवी कर्मी अवैध वसूली के आरोपों के बाद काम छोड़कर फरार हो गए, वहीं एक महिला ममता देवी ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाकर समाज को एक नई दिशा दिखाई है। कहानी की शुरुआत एक कड़वे सच से होती है। बीते सोमवार को सदर प्रखंड के भोज्या गांव में मां समेत दो बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। आरोप है कि सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम कर्मियों ने शोकाकुल परिजनों से ₹5000 की अवैध वसूली की। मामला तूल पकड़ा तो कार्रवाई के डर से सभी पोस्टमार्टम कर्मी अस्पताल से फरार हो गए और काम करने से इनकार कर दिया।इसका खामियाजा भुगतना पड़ा आज उन परिजनों को, जो रोजगार सेवक राजेश शर्मा के संदिग्ध मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम कराने अस्पताल पहुँचे थे। सुबह से दोपहर के 12 बज गए, लेकिन कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था। हम अपने भाई राजेश शर्मा का शव लेकर सुबह से आए थे। 4-5 घंटे तक भटकते रहे। पोस्टमार्टम कर्मियों के घर तक गए, लेकिन वे नहीं मिले। पता चला कि अवैध वसूली के आरोप के बाद वे काम नहीं कर रहे हैं। हम बेबस थे, तब जाकर सिविल सर्जन ने समाधान निकाला। जब सिस्टम लाचार खड़ा था, तब चतरा के सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह के संज्ञान में यह मामला आया। उन्होंने एक साहसिक फैसला लेते हुए ‘ममता देवी’ को इस कार्य के लिए नियुक्त किया। ममता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस चुनौती को स्वीकार किया और पोस्टमार्टम का जिम्मा संभाला। यह चतरा के इतिहास में पहली बार है जब एक महिला ने इस कठिन और संवेदनशील कार्य को अपनी स्वेच्छा से अपनाया है। लोग कहते हैं कि महिलाएं कमजोर होती हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर हम घर संभाल सकते हैं, तो पीड़ितों की सेवा क्यों नहीं कर सकते? मुझे इस काम को करने में कोई डर नहीं लगता, बल्कि खुशी है कि मैं मुश्किल वक्त में लोगों के काम आ पा रही हूँ। मैं इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह उत्साहित हूँ।अस्पताल प्रबंधन ने ममता की नियुक्ति को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। पुराने कर्मियों की मनमानी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह एक कड़ा संदेश भी है। ममता अब सदर अस्पताल की एक आधिकारिक कर्मचारी के रूप में सेवा देंगी।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार ने बताया कि यह हमारे जिले के लिए एक उपलब्धि है। पुराने कर्मी अवैध वसूली के चक्कर में काम छोड़ चुके हैं, लेकिन अब ममता कुमारी को सिविल सर्जन सर के निर्देश पर रखा गया है। उन्होंने जिस साहस के साथ यह काम शुरू किया है, वह नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है। चतरा की ममता देवी ने आज उन लोगों के मुँह पर तमाचा जड़ा है जो भ्रष्टाचार के जरिए मजबूर लोगों को लूटते थे। उन्होंने साबित कर दिया है कि सेवा का कोई लिंग नहीं होता। आज जब ममता के हाथ पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए पोस्टमार्टम जैसे कठिन कार्य की ओर बढ़े हैं, तो पूरा चतरा उनके इस हौसले को सलाम कर रहा है।

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