कोडरमा। भारतीय रेलवे ने बिजली खर्च कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कोडरमा गया रेलखंड पर ग्रीन एनर्जी मिशन को तेज कर दिया है। अब बड़े स्टेशनों के साथ छोटे-छोटे स्टेशनों को भी सोलर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल बिजली की लागत में कमी आएगी बल्कि स्टेशनों की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी। पहाड़पुर रेलवे स्टेशन के पैनल भवन पर 20 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जा रहा है। यह प्लांट स्टेशन की दैनिक बिजली जरूरतों को पूरा स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। ताकि स्टेशनो पर यात्रियों की सुविधा के लिए रोशनी, पंखा आदि कार्यों में सोलर पैनल का उपयोग किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों के मशीनरी का संचालन किया जा सके। बताया गया कि अन्य छोटे-छोटे स्टेशनों पर जरूरत की क्षमता के अनुसार सोलर प्लांट का पावर क्षमता स्थापित किया जाएगा। बड़े-बड़े स्टेशनों पर पहले से सोलर प्लांट स्थापित हैं, जिन स्टेशनों पर अभी तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है, वहां जल्द यह सुविधा दी जानी है। बिजली कटौती की समस्या से मिलेगी राहत कोडरमा गया रेल सेक्शन के टनकुप्पा, बंधुआ, गुरपा, वंशीनाला, गझण्डी दिलवा, यदुग्राम, बसकटवा, नाथगंज आदि छोटे-छोटे स्टेशनों पर सोलर ऊर्जा के उपयोग से बिजली को बढ़ावा मिलेगा। अक्सर होने वाली बिजली कटौती की समस्या में काफी हद तक सुधार होगा। स्थानीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। अक्सर होने वाली बिजली कटौती की समस्या में काफी हद तक सुधार होगा। स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन होने से ट्रेनों के संचालन और स्टेशन की अन्य सेवाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। रेलवे का लक्ष्य कम लागत, शून्य कार्बन उत्सर्जन रेलवे का मुख्य उद्देश्य बाहरी बिजली पर निर्भरता कम करना और शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि रेलवे के राजस्व में भी बचत होगी। यह पहल ग्रीन रेलवे मिशन को मजबूत करते हुए भविष्य में कोटपहाड़पुर स्टेशन पर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर प्लांट लग रहा है। बिजली खर्च में कमी आएगी और निर्भरता बाहरी स्रोतों पर घटेगी। अन्य स्टेशनों के लिए भी एक उदाहरण अन्य स्टेशनों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी। कोटपहाड़पुर स्टेशन पर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर प्लांट लग रहा है। बिजली खर्च में कमी आएगी और निर्भरता बाहरी स्रोतों पर घटेगी। 20 किलोवाट क्षमता का यह प्लांट स्टेशन की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा। आने वाले समय में अन्य स्टेशनों पर भी इस योजना का विस्तार किया जाएगा, ताकि रेलवे पूरी तरह ऊर्जा दक्ष बन सके।

