जमशेदपुर। प्रभु यीशु मसीह के बलिदान, प्रेम और क्षमा के संदेश को स्मरण करते हुए शहरभर में गुड फ्राइडे का पर्व शुक्रवार को गहरी आस्था, सादगी और गंभीरता के साथ मनाया गया। विभिन्न गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जहां बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोग शामिल हुए और मानवता के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इकसे पूर्व ईसाई समुदाय के लोग ने शहर के विभिन्न कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों के कब्रों की साफ-सफाई की गई।
शहर के प्रमुख गिरजाघरों, जिनमें सेंट जोसेफ कैथेड्रल गोलमुरी और सेंट मेरी चर्च बिष्टुपुर के साथ-साथ टेल्को, साकची और अन्य इलाकों के चर्चों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। गिरजाघरों का वातावरण पूरी तरह शांत, अनुशासित और भक्तिमय बना रहा।
सुबह से ही श्रद्धालु काले और गहरे रंग के परिधानों में चर्च पहुंचे, जो शोक और आत्ममंथन का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर ‘क्रूस की राह’ (Way of the Cross) का आयोजन किया गया, जिसमें प्रभु यीशु मसीह के अंतिम समय की घटनाओं और उनके द्वारा सहे गए कष्टों को स्मरण किया गया। श्रद्धालुओं ने गीत, भजन और प्रार्थनाओं के माध्यम से उनके त्याग और प्रेम को याद किया।
गिरजाघरों के पादरियों ने पवित्र बाइबल का पाठ करते हुए यीशु मसीह के क्षमा, करुणा और अहिंसा के संदेश को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि गुड फ्राइडे केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और मानवता के लिए समर्पण का भी अवसर है।
मान्यता के अनुसार दोपहर का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी समय प्रभु यीशु ने क्रूस पर अपने प्राण त्यागे थे। इस दौरान गिरजाघरों में पूर्ण शांति रखी गई और विशेष शोक सभाओं का आयोजन हुआ। कई श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखकर विश्व शांति, समाज की भलाई और मानवता की रक्षा के लिए प्रार्थना की।
पूरे दिन शहर का माहौल आध्यात्मिक और गंभीर बना रहा। श्रद्धालुओं ने सादगी के साथ इस दिन को मनाते हुए प्रभु यीशु के दिखाए मार्ग—प्रेम, त्याग और क्षमा—पर चलने का संकल्प लिया।
सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा सभी प्रमुख चर्च परिसरों में पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कहीं भी किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल तैनात रहा और प्रार्थना सभाएं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं।

