जमशेदपुर। भारतीय उद्योग जगत में जब भरोसे, गुणवत्ता और सामाजिक उत्तरदायित्व की बात होती है तो सबसे पहले टाटा समूह का नाम सामने आता है। लगभग 118 वर्षों से अधिक समय से यह समूह देश और दुनिया में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इस्पात से लेकर मोटर वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी, चाय, नमक और आतिथ्य सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय टाटा समूह आज 150 से अधिक देशों में कारोबार कर रहा है। इसकी पहचान केवल एक औद्योगिक घराने की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाली संस्था के रूप में है।
इस औद्योगिक विरासत की नींव वर्ष 1907 में रखी गई थी, जब दूरदर्शी उद्योगपति जमशेदजी टाटा ने भारत में आधुनिक इस्पात उद्योग स्थापित करने का साहसिक निर्णय लिया। उस समय देश में भारी उद्योगों की कल्पना भी कठिन थी, लेकिन सीमित संसाधनों और लगभग 21 हजार रुपये की प्रारंभिक पूंजी से शुरू हुई यह यात्रा आज विश्वस्तरीय पहचान बन चुकी है। जमशेदजी का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं था, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के अवसर पैदा करना था।
जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता नसरवानजी टाटा पारसी पुजारी वर्ग से जुड़े दस्तूर परिवार के सदस्य थे। पारसी समुदाय का इतिहास बताता है कि उनके पूर्वज ईरान से भारत आए और गुजरात के संजान तथा बाद में नवसारी में बस गए। प्रारंभ में परिवार का उपनाम ‘दस्तूर’ था, लेकिन समय के साथ ‘टाटा’ नाम प्रचलित हो गया। कहा जाता है कि परिवार के कुछ पूर्वजों के तेज स्वभाव के कारण उन्हें गुजराती बोलचाल में ‘टाटा’ कहा जाने लगा और यही संबोधन आगे चलकर स्थायी उपनाम बन गया।
जमशेदजी ने केवल उद्योग की स्थापना ही नहीं की, बल्कि एक आदर्श औद्योगिक नगर का सपना भी देखा। उनके इसी सपने का परिणाम है जमशेदपुर, जिसे आज देश की औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। इस शहर की पहचान टाटा स्टील से गहराई से जुड़ी हुई है। टाटा स्टील ने न केवल इस्पात उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि शहर के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हर वर्ष 3 मार्च को संस्थापक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर पूरा जमशेदपुर रोशनी से जगमगा उठता है। साकची स्थित जुबली पार्क को आकर्षक विद्युत सजावट से सजाया जाता है और हजारों लोग इस भव्य दृश्य का आनंद लेने पहुंचते हैं। शहर को दुल्हन की तरह सजाने की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं।
जमशेदजी टाटा प्रकृति प्रेमी थे और उन्होंने अपने सपनों के शहर को हरियाली से आच्छादित रखने की योजना बनाई थी। यही कारण है कि जमशेदपुर को देश के सबसे स्वच्छ और सुव्यवस्थित औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। टाटा समूह का मूल मंत्र “स्टील से मजबूत हमारा विश्वास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि उसके कार्य सिद्धांत का आधार है।
आज टाटा नाम केवल एक उद्योग समूह का प्रतीक नहीं, बल्कि भरोसे और विश्वसनीयता का पर्याय बन चुका है। दस्तूर परिवार से निकलकर ‘टाटा’ नाम तक पहुंची यह यात्रा संघर्ष, दूरदर्शिता और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

