चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए गठित जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने केंद्रीय खनन मंत्रालय को पत्र भेजकर चाईबासा स्थित DMFT में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
25 फरवरी 2026 को केंद्रीय खान सचिव, नई दिल्ली को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को भी भेजी गई है।
*3344 करोड़ रुपये खर्च पर सवाल*
पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2015 में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम-1957 में संशोधन के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए DMFT का गठन किया गया था। अगस्त 2025 तक पश्चिम सिंहभूम जिले में लगभग 3344 करोड़ रुपये DMFT मद में जमा हुए हैं।
आरोप है कि इन राशि का उपयोग शुद्ध पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों के कल्याण, कौशल विकास, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए होना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है।
*खनन क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी*
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र लौह अयस्क खनन के लिए प्रसिद्ध हैं। चिरिया, गुवा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और नोवामुंडी की खदानों से करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद आरोप है कि कई खनन प्रभावित गांवों में लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल रहा है, विद्यालयों में स्वीकृत पदों के बावजूद शिक्षकों की कमी है, स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई ग्रामीण आज भी नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं।
*8755 योजनाएं स्वीकृत, 3000 अधूरी*
पत्र में दावा किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में DMFT के तहत 8755 योजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से लगभग 3000 योजनाएं अधूरी हैं। आरोप है कि DMFT नियमावली में निर्धारित प्राथमिकताओं की अनदेखी कर राशि का उपयोग कथित रूप से चहेते संवेदकों को लाभ पहुंचाने में किया गया है।
*उच्च स्तरीय जांच की मांग*
सुशील बारला ने मांग की है कि चाईबासा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संवेदकों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
फिलहाल जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

