जमशेदपुर।एक मार्च को मनाए जाने वाले विश्व सिविल डिफेंस दिवस के अवसर पर विश्व सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने कहा कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में प्रशिक्षित नागरिक ही राष्ट्र की वास्तविक ताकत साबित होते हैं। उन्होंने बताया कि सिविल डिफेंस का उद्देश्य केवल युद्धकालीन सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शांति काल में भी संभावित आपदाओं के प्रति जागरूकता, प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
संतोष कुमार ने जानकारी दी कि विश्व स्तर पर सिविल डिफेंस की अवधारणा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विकसित हुई, जब हवाई हमलों से व्यापक विनाश हुआ। उस समय यह महसूस किया गया कि केवल सैन्य बल पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी संगठित और प्रशिक्षित कर राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया जाना चाहिए। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री Winston Churchill ने सिविल डिफेंस को “चौथी सेना” की संज्ञा दी थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके विकास में Sir John Eric Hodsoll की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है, जिन्होंने एयर रेड प्रिकॉशन व्यवस्था को व्यवस्थित रूप दिया।
भारत में सिविल डिफेंस की स्थापना 1942 में की गई और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसे अधिक संगठित रूप मिला। वर्तमान में यह संगठन गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और जिला प्रशासन के नेतृत्व में स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव, अग्निशमन, प्राथमिक उपचार, संचार प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने कहा कि भूकंप, बाढ़, आगजनी, रासायनिक दुर्घटनाओं या अन्य मानवजनित संकटों में सिविल डिफेंस स्वयंसेवक पहली प्रतिक्रिया टीम के रूप में कार्य करते हैं। संगठन का मूल मंत्र “सर्व भूतहिते रताः” Bhagavad Gita से लिया गया है, जो निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में सिविल डिफेंस से जुड़कर राष्ट्र सेवा में योगदान दें।

