Breaking
Wed. Mar 18th, 2026

गुमला की धरती साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार

गुमला। माननीया राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी की गरिमामयी उपस्थिति में मंगलवार को गुमला में आयोजित ‘अंतर्राज्यीय जन सांस्कृतिक समागम सह कार्तिक जतरा’ समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि गुमला की धरती केवल संस्कृति और परंपराओं की ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भी प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का यह प्रवास झारखण्ड के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है और इससे राज्य के लोगों में नया उत्साह एवं ऊर्जा का संचार हुआ है।

राज्यपाल ने इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का झारखण्ड की वीर और समृद्ध जनजातीय परंपराओं वाली भूमि पर आगमन के लिए हार्दिक अभिनंदन किया। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तथा विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों और संस्कृतिप्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विविध संस्कृतियों के संगम का जीवंत उदाहरण है।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि झारखण्ड के राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद उन्होंने राज्य के अधिकांश जिलों के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर आमजन से सीधा संवाद स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि ‘लोक भवन’ को राज्य के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाना और इसे आम लोगों के हितों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाना उनका संकल्प है। लोकतंत्र की असली ताकत जनता से जुड़े रहने में ही निहित है। उन्होंने झारखण्ड के लोगों को परिश्रमी बताते हुए कहा कि राज्य की महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं, जिससे सामाजिक नेतृत्व और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल रही है।

राज्यपाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखण्ड के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल का स्मरण करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि झारखण्ड की कुल जनसंख्या में लगभग 28 प्रतिशत जनजातीय समुदाय का योगदान है और राज्य में 32 अनुसूचित जनजातियाँ तथा अनेक पीवीटीजी समुदाय निवास करते हैं। इनके सर्वांगीण विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

राज्यपाल ने कहा कि अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक समागम जैसे आयोजन विभिन्न राज्यों की लोक-परंपराओं, नृत्य, संगीत, वेश-भूषा और जीवन-दर्शन को एक मंच पर लाने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजन माननीय प्रधानमंत्री के “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सौहार्द को सुदृढ़ करते हैं। अंत में उन्होंने राष्ट्रपति महोदया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि उनका यह प्रवास जनजातीय समाज, महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ने की नई दिशा प्रदान करेगा।

Related Post