जमशेदपुर/ पोटका
पोटका के पोड़ा तेतला पंचायत एवं गोयाल काटा पंचायत अंतर्गत19 गांव जो आते हैं, वही 19 गांव के सांस्कृतिक दल के अगुबाई का बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण चेतना केदो बड़ा सिगदी के द्वारा किया गया। बैठक में गांव समाज की रीति रिवाज से जुड़ा हुआ संस्कृत नित्य गीत हर गांव में जिंदा है। कालक्रम में बहुत सारे गांव में गाजा- बाजा नहीं रहने से युवा पीढ़ी पैड और डीजे से थिरकते हैं और गाजा बाजा से दूर होते जा रहे हैं। बैठक में बुजुर्गों लोगों का कहना है कि अपने गाजा- बाजा के साथ जोड़ते हुए परनिर्भशील संस्कृति से सनिर्भरशील संस्कृति की ओर लाने से हि हमारा संस्कृति धरोहर को और समृद्धि बना सकते हैं। क्योंकि हमारा संस्कृति नाचने गाने का ही नहीं है, और ना ही बिकाऊ है। हमारा संस्कृति सामूहिकता और सहभागिता का संस्कृति है। हमारे संस्कृत में दर्शक नहीं होते हैं। सारे लोग अखाड़ा में किसी न किसी रूप में सहभागी बन जाते हैं। इस बैठक का अंत में विचार विमर्श के साथ सांस्कृतिक दलों की लोगों के दुख सुख में कैसे सहभागी बने और निरस्त अखाड़ा को सक्रिय बनने पर जोर दिया गया तथा सांस्कृतिक दल के सदस्यों के एक भी बच्चा स्कूल के बाहर ना रहे और उन्हें कृषि और आजीविका उपार्जन संस्कृति से जोड़ते हुए जलवायु परिवर्तन की रोकथाम तक सामूहिक प्रयास पर विशेष चिंतन मंथन किया गया। इस बैठक में पर्यावरण चेतना केंद्र के निर्देशक सिद्धेश्वर सरदार, कोऑर्डिनेटर गोपाल किस्कु, लक्ष्मी सिंह ,सूरेश सरदार, गौरी सरदार ,लखींद्रर सरदार, जोबा टुडू, अर्जुन सरदार, घासीराम सरदार, सुधीर सोरेन, मोहन माझी, खुदीराम सोरेन, चूड़ा सोरेन, राम किस्कु, बादल मुर्मू, सुशील सरदार, शीला भूमिज, जमुना हेंब्रम,रायमनी सोरेन, पांनसरी माडीॅ, संगीता भूमिका आदि के साथ सांस्कृतिक दलों के सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

