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जान हथेली पर रख रेलवे ट्रैक पार कर बच्चे जाते हैं स्कूल, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना

ओवरब्रिज में अचानक से आए ट्रेन से बचने के लिए सेंटर बनाया जाय—वीरसिंह मुण्डा

 

 

गुवा ।गुवा क्षेत्र के ठाकुरा गांव के बच्चे जान हथेली पर रख स्कूल पढ़ने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर जाते हैं । गुरुवार सुबह 9 बजे स्कूली बच्चों को रेलवे ट्रैक पार्कर स्कूल जाते देखा गया।

ज्ञात हो कि ठाकुरा गांव से गुवा बाजार आने के लिए डीएमएफटी फंड द्वारा वर्ष 2010 में सांसद गीता कोड़ा के प्रयास से ठाकुरा गांव के ग्रामीणों के लिए आने जाने के लिए एक पुलिया का निर्माण कराया गया था। परंतु यह पुलिया ठाकुरा गांव के ग्रामीण गुवा बाजार जाने के लिए काफी लंबी दूरी तय कर गुवा बाजार आते हैं। ठाकुरा गांव के गुवा बाजार आने का सबसे कम दूरी भारत आजादी के पहले से रेलवे द्वारा बनाया गया रेलवे ओवरब्रिज पार कर गुवा बाजार आते हैं। ठाकुरा गांव से रेलवे द्वारा बनाया गया ओवरब्रिज पार कर गुवा आने में लोगों को मात्र 5 मिनट का समय लगता है। परंतु डीएमएफटी फड द्वारा बनाया गया पुलिया से पार कर गुवा बाजार आने में लगभग 45 मिनट का समय लग जाता है। इसी कम दूरी को लेकर स्कूली बच्चे भी जान हथेली पर लेकर रेलवे ओवरब्रिज पार कर स्कूल पढ़ने जाते हैं। जिससे कभी भी बहुत बड़ी दुर्घटना घट सकती है।झारखण्ड माइंस मजदूर यूनियन के महासचिव सह समाजसेवी

वीरसिंह मुण्डा ने उक्त तथ्यों को बताया कि रेलवे विभाग की ट्रेन ओवरब्रिज में अचानक से आ जाने पर दो ही रास्ता बच जाता है एक तो यह है कि रेलवे ओवरब्रिज से कारो नदी में छलांग लगाना या रेलवे ट्रैक में आत्महत्या करना। इससे कुछ साल पूर्व कई दुर्घटनाएं हो भी चुकी है कईयों ने अपनी जान गवा चुके हैं। कईयों ने ट्रेन के नीचे आने से बचने के लिए रेलवे ओवरब्रिज से कारों नदी से छलांग लगाया और वह अपनी जान नहीं बचा पाया। अचानक से आए ट्रेन से बचने के लिए लोग दोनों रास्ते मौत को आमंत्रण दे रहा है।झारखण्ड माइंस मजदूर यूनियन के महासचिव सह समाजसेवीवीरसिंह मुण्डा ने रेलवे विभाग से मांग की है कि रेलवे द्वारा बनाया गया ओवरब्रिज में जगह -जगह लोगों को अचानक से आए ट्रेन से बचने के लिए सेंटर बनाया जाए ताकि लोग वहां खड़ा होकर ट्रेन पार हो जाने के बाद रेलवे ट्रैक पार कर byसके।

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