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Wed. Mar 18th, 2026

जलमीनार में वन विभाग द्वारा प्रशासन फंड मिटाने की मामले का पंचायत सेवक ने की स्थल जांच उपायुक्त ने मामले की दिए थे जांच के आदेश

 

 

जलमीनार में वन विभाग द्वारा प्रशासन फंड मिटाने की मामले का पंचायत सेवक ने की स्थल जांच

 

उपायुक्त ने मामले की दिए थे जांच के आदेश

 

चंदवा। उपायुक्त अबु इमरान के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सुरेन्द्र सिंह के आदेश पर चेटर पंचायत के रूद ग्राम के टोला गुंजराय में जलमीनार में वन विभाग द्वारा जिला प्रशासन फंड मिटाने की मामले का पंचायत सेवक अर्जुन लकड़ा ने बुधवार को स्थल जांच किया, मुखिया रूणा देवी और उपस्थित ग्रामीणों से इस संबंध में पूछताछ कर जानकारी हासिल की, जिस समय पंचायत सेवक गांव में उपस्थित थे उस समय भी जलमीनार में वन प्रक्षेत्र चंदवा, वन प्रमंडल लातेहार लिखा हुआ था, ग्रामीणों ने पंचायत सेवक को बताया करीब दो तीन वर्ष पूर्व उपायुक्त से जलमीनार व डीप बोरिंग कि मांग किए थे,

इसके बाद उपायुक्त ने पानी समस्या दूर करने के लिए गुंजरांई टोला में जलमीनार का टंकी, सोलर, मोटर पाईप पिलर समेत पूरा सामान वाहन से भेज दिए थे, हम ग्रामीणों के देखरेख में जलमीनार लगाया गया, वन विभाग की कर्मियों के द्वारा जलमीनार में लिखे जिला प्रशासन फंड को जब मिटाया जा रहा था उस समय मिटाने का हम सभी ग्रामीण विरोध भी किए इसके बाद भी वन कर्मी नहीं माने।

गौरतलब हो कि इस मामले को कॉग्रेस, माकपा और झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के नेताओं कॉग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि असगर खान, झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा सचिव जितेंद्र सिंह, माकपा नेता सह सामाजिक कार्यकर्ता अयुब खान ने गांव का दौरा कर इस प्रमुखता से उठाते हुए पूरे मामले पर जांचकर कार्रवाई करने की मांग उपायुक्त अबु इमरान व डीएफओ से किया था।

मामला तुल पकड़ने पर वन विभाग ने जलमीनार में लिखवाए वन प्रक्षेत्र चंदवा को मिटा दिया है।

 

फॉरेस्ट विभाग द्वारा जलमीनार को लगाया गया, फिर खोलकर ले गए इसकी जांच की जाए

 

नेताओं ने कहा कि इधर इसी स्थान पर करीब 3 वर्ष पूर्व वन विभाग चंदवा ने सिंगल पाईप के सहारे एक जलमीनार लगाया था इसे गिरने के बाद वन विभाग ने जलमीनार को ठीक कराने के बजाय उसे खोलकर ले गए, इसपर नेताओं ने कहा कि इस मामले का भी जांच जरूरी है, आंखिर छह माह में वन विभाग का जलमीनार कैसे गिर सकता है और यदि गिरा है तो उसे ठीक करने के बजाय फॉरेस्ट विभाग उसे क्यों खोलकर ले गई, पेयजल सुविधा से ग्रामीणों को क्यों वंचित किया, खोलकर ले जाना ही था तो क्यों लगवाया था।

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