जमशेदपुर। स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और सतत विकास से जोड़ने की दिशा में टेल्को स्थित गुलमोहर हाई स्कूल ने महत्वपूर्ण पहल की है। स्कूल की प्राचार्या प्रीति सिन्हा के नेतृत्व में जमशेदपुर के सात विद्यालयों के 12 शिक्षाविदों ने आईआईटी खड़गपुर में आयोजित तीन दिवसीय ग्रीन इनोवेशन एंड सस्टेनेबिलिटी बूटकैंप में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 3 से 5 नवंबर तक आयोजित किया गया।
आईआईटी खड़गपुर के राजेंद्र मिश्रा स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंटरप्रेन्योरशिप की ओर से संस्थान के प्लैटिनम जुबली समारोह के तहत आयोजित बूटकैंप में स्कूली शिक्षा को अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसमें गुलमोहर हाई स्कूल के अलावा लोयोला स्कूल, लिटिल फ्लावर स्कूल, हिल टॉप स्कूल, मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, जेएच तारापोर स्कूल और वैली व्यू स्कूल के शिक्षाविद शामिल हुए।
बूटकैंप में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों के अलावा देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्यमिता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने शिक्षकों के साथ अपने अनुभव साझा किए। आईआईटी खड़गपुर के एसोसिएट डीन प्रो. मनोज कुमार मंडल ने डिजाइन थिंकिंग, रैपिड प्रोटोटाइपिंग और प्रयोग आधारित नवाचार की जानकारी दी। प्रो. अविरु कुमार बसु ने पर्यावरणीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान से जुड़े शोध और नवाचार के उदाहरण प्रस्तुत किए।
फिनलैंड के हांकेन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर मृणालिनी कोचुपिल्लई ने सतत विकास के लिए मानसिक और भावनात्मक संतुलन, दृढ़ता तथा रचनात्मक सोच के महत्व पर चर्चा की। जापान के यूनिवर्सिटी ऑफ टोयामा से जुड़े विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय स्थिरता के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों से परिचित होने का अवसर मिला। वहीं फुस्की वेंचर्स के सौम्यजीत गुहा ने उद्यमिता की अवधारणाओं को व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया।
कार्यक्रम में सर्कुलर इकोनॉमी, हरित उद्यमिता, बाजार परीक्षण, सतत व्यावसायिक मॉडल और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे तरीके समझाना था, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
गुलमोहर हाई स्कूल की प्राचार्या प्रीति सिन्हा ने कहा कि भविष्य के नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए शिक्षकों को भी कक्षा की पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर अनुसंधान और नवाचार का अनुभव हासिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल शिक्षकों की सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि जमशेदपुर के विभिन्न विद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना भी है।
उन्होंने आईआईटी खड़गपुर के आरएमएसओईई की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रभा भोला, उनकी शोधार्थी टीम और कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। साथ ही अंकुर गंडोत्रा के प्रयासों को भी इस शैक्षणिक पहल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बूटकैंप के अनुभव को अब विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा। भविष्य में शिक्षकों के प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के लिए मेंटरशिप, संयुक्त परियोजनाओं, अनुभवात्मक शिक्षण तथा उद्यमिता और सतत विकास से जुड़ी छात्र गतिविधियों के लिए आईआईटी खड़गपुर के सहयोग की संभावनाएं तलाशने की योजना है। इससे जमशेदपुर के स्कूलों में नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलने और विद्यार्थियों में समस्या समाधान की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।

