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अरका जैन यूनिवर्सिटी में इंडस्ट्री-एकेडेमिया समिट, एमबीए विद्यार्थियों को मिले कॉरपोरेट जगत के अनुभव और सुझाव

गम्हरिया: अरका जैन विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट विभाग (एमबीए) की ओर से इंडस्ट्री मेंटर बोर्ड के सहयोग से इंडस्ट्री-एकेडेमिया समिट का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों और एमबीए के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कॉरपोरेट जगत की कार्यशैली, उद्योगों की बदलती जरूरतों और रोजगार के लिए जरूरी कौशल की जानकारी देना था.

समिट में इंडस्ट्री मेंटर के रूप में एनईईवी की शिखा जैन, हाइको प्राइवेट लिमिटेड के तपस साहू, हिमालय एंटरप्राइजेज के राजीव शुक्ला, सुदिशा फाउंड्री के उमेश मकवाना और टाटा कमिंस के नरेंद्र कुमार शामिल हुए. सभी विशेषज्ञों ने अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए और उन्हें कॉरपोरेट जगत की चुनौतियों से निपटने के तरीके बताए.

चर्चा के दौरान सस्टेनेबिलिटी, इमोशनल इंटेलिजेंस, काम के प्रति जिम्मेदारी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सही इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी बात हुई. विशेषज्ञों ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धा भरे दौर में केवल किताबी ज्ञान के सहारे आगे बढ़ना आसान नहीं है. विद्यार्थियों को अपने विषय की अच्छी समझ के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल करना होगा, ताकि वे कार्यक्षेत्र में आने वाली समस्याओं का समाधान कर सकें.

मेंटर्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि कॉरपोरेट जगत में खुद को साबित करने के लिए लगातार नई चीजें सीखना और बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलना जरूरी है. उन्होंने कहा कि व्यावहारिक अनुभव के साथ मजबूत शैक्षणिक आधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है. विषयों की बुनियादी समझ ही बेहतर निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में सही समाधान खोजने में मदद करती है.

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सवाल पूछने, नई जानकारियां हासिल करने और बदलते समय के अनुसार अपनी कार्यक्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि किताबी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का मेल ही एक बेहतर पेशेवर बनने में मदद करता है.

विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को सीधे उद्योग जगत के अनुभवी लोगों से बातचीत करने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिला. विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनाना तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.

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